देश के इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) में बड़ा बदलाव होने वाला है. जिसको लेकर सरकार शीतकालीन सत्र में IBC Amendment Bill 2025 पेश करने की तैयारी में है. वहीं इस संशोधन को अब तक का सबसे बड़ा संशोधन माना जा रहा है. ये बदलाव दिवालियापन प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को नई दिशा देने के मकसद से किया जा रहा है. इसको लेकर सबसे ज्यादा चर्चा जिस प्रावधान की हो रही है, वो है सेक्शन 29A, जो किसी कंपनी के प्रमोटर या उसके ब्लड रिलेशन को दिवालिया कंपनी की बोली प्रक्रिया में भाग लेने से रोक देता है.
ICAI ने संसदीय समिति सामने पेश किए सुझाव
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की शीर्ष संस्था आईसीएआई (ICAI) ने गुरुवार को इस बिल को लेकर संसदीय समिति के सामने अपने सुझाव पेश किए. फिलहाल ये समिति जिसकी अध्यक्षता भाजपा सांसद बैजयंत पांडा कर रहे हैं, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 पर विचार कर रही है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आईसीएआई ने IBC के तहत चल रही प्रक्रियाओं को ज्यादा प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के लिए कई सुझाव दिए हैं, ताकि दिवालिया कंपनियों के समाधान (Resolution Process) में देरी और समस्याओं को कम किया जा सके.
क्या है सेक्शन 29A?
दरअसल इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड का सेक्शन 29A यह तय करता है कि कौन व्यक्ति या संस्था किसी दिवालिया कंपनी के समाधान प्रक्रिया में भाग लेने के योग्य है. इस सेक्शन के तहत कंपनी के प्रमोटर, उनके नजदीकी रिश्तेदार (ब्लड रिलेशन) या कंपनी से जुड़े लोगों को उस कंपनी की बोली प्रक्रिया में शामिल होने का अधिकार नहीं होता है. सरकार का मकसद ये था कि जो व्यक्ति किसी कंपनी को डुबोने के लिए जिम्मेदार है, वह दोबारा उसी कंपनी का मालिक न बन सके लेकिन उद्योग जगत का कहना है कि यह प्रावधान बहुत व्यापक है. जिसकी वजह से ऐसे लोग भी प्रभावित हो रहे हैं, जिनका कंपनी से कोई प्रत्यक्ष व्यावसायिक संबंध नहीं होता है. सिर्फ पारिवारिक रिश्ता होता है.
कॉरपोरेट लॉ विशेषज्ञों और इंडस्ट्री बॉडीज की राय
इसको लेकर कई कॉरपोरेट लॉ विशेषज्ञों और इंडस्ट्री बॉडीज का मानना है कि अब इस सेक्शन में बदलाव का समय आ गया है. उनका कहना है कि अगर किसी रिश्तेदार का कंपनी के संचालन या वित्त से कोई लेना-देना नहीं है, तो महज ब्लड रिलेशन के आधार पर उसे दिवालिया प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जाना चाहिए.