दुनियाभर में T20 फ्रेंचाइजी क्रिकेट तेजी से फैल रहा है। हर साल नई लीग शुरू हो रही हैं और खिलाड़ियों को करोड़ों रुपये के कॉन्ट्रैक्ट मिल रहे हैं। ऐसे में कई क्रिकेट बोर्ड और ICC इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कहीं फ्रेंचाइजी क्रिकेट इंटरनेशनल क्रिकेट पर भारी न पड़ जाए। इसी वजह से ICC ने एक नई समिति बनाने का फैसला किया है, जो इस बात का अध्ययन करेगी कि इंटरनेशनल क्रिकेट और फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
ICC ने क्यों बनाई समिति?
ICC बोर्ड की बैठक में फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बढ़ते विस्तार पर चर्चा हुई। बोर्ड का मानना है कि लगातार बढ़ती T20 लीगों की वजह से इंटरनेशनल सीरीज और भविष्य के टूर कार्यक्रमों पर दबाव बढ़ रहा है। नई समिति यह जांच करेगी कि मौजूदा क्रिकेट कैलेंडर में फ्रेंचाइजी लीगों को किस तरह समायोजित किया जाए, ताकि इंटरनेशनल क्रिकेट को नुकसान न पहुंचे। ICC का कहना है कि यह कदम खेल के लंबे भविष्य को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
5 वजहें जिनसे बढ़ी ICC की चिंता
ICC की चिंता के पीछे कई बड़े कारण हैं। पहला, दुनिया भर में T20 लीगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। दूसरा, खिलाड़ियों को फ्रेंचाइजी क्रिकेट से इंटरनेशनल क्रिकेट की तुलना में ज्यादा कमाई हो रही है। तीसरा, कई देशों के क्रिकेट बोर्ड अपने प्रमुख खिलाड़ियों की उपलब्धता को लेकर परेशान हैं। चौथा, लगातार व्यस्त शेड्यूल की वजह से इंटरनेशनल सीरीज प्रभावित हो रही हैं। पांचवां, कई खिलाड़ी कम उम्र में ही इंटरनेशनल क्रिकेट छोड़कर सिर्फ लीग क्रिकेट खेलने का रास्ता चुन रहे हैं।
बढ़ता जा रहा है लीग क्रिकेट का दायरा
IPL, SA20, ILT20, बिग बैश लीग, बांग्लादेश प्रीमियर लीग, लंका प्रीमियर लीग, द हंड्रेड और कैरेबियन प्रीमियर लीग जैसी प्रतियोगिताएं पहले से क्रिकेट कैलेंडर का बड़ा हिस्सा बन चुकी हैं। अब यूरोपियन T20 प्रीमियर लीग भी शुरू होने जा रही है। इससे खिलाड़ियों के लिए खाली समय और कम हो जाएगा। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह चुनौती और बड़ी हो सकती है।
कई स्टार खिलाड़ियों ने चुना दूसरा रास्ता
पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े खिलाड़ियों ने इंटरनेशनल क्रिकेट से दूरी बनाकर फ्रेंचाइजी क्रिकेट को प्राथमिकता दी है। निकोलस पूरन ने अपेक्षाकृत कम उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहा। हेनरिक क्लासेन भी इसी राह पर चले। वहीं सुनील नरेन लंबे समय से केवल फ्रेंचाइजी क्रिकेट में सक्रिय हैं। ऐसे उदाहरण ICC की चिंता बढ़ा रहे हैं, क्योंकि इससे राष्ट्रीय टीमों की ताकत पर असर पड़ सकता है।
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क्या बदल सकता है क्रिकेट का भविष्य?
ICC की नई समिति की रिपोर्ट आने के बाद कुछ बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। इसमें खिलाड़ियों के लिए लीग खेलने की संख्या तय करने जैसे सुझाव भी शामिल हो सकते हैं। फिलहाल ICC की कोशिश यही है कि इंटरनेशनल क्रिकेट अपनी अहमियत बनाए रखे और फ्रेंचाइजी क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव के बावजूद दोनों के बीच सही संतुलन बना रहे।