मुंबई- वैश्विक राजनीति, नई तकनीक और बदलते सामरिक समीकरणों के बीच देश की आर्थिक राजधानी में आयोजित ‘आइडियाज ऑफ इंडिया समिट 2026’ के पहले दिन दुनिया के दिग्गज रणनीतिकारों और विचारकों ने मौजूदा वर्ल्ड ऑर्डर पर खुलकर चर्चा की। मंच से एआई के खतरों से लेकर अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता, भारत-चीन तनाव, टैरिफ पॉलिसी और वैश्विक शांति प्रयासों तक कई बड़े मुद्दों पर बेबाक राय सामने आई।
एआई पर यान शुएतोंग की चेतावनी: “मशीनों का युग, पर नियंत्रण जरूरी”
यान शुएतोंग ने कहा कि दुनिया तेजी से मशीनों के दौर में प्रवेश कर चुकी है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इसका केंद्र बिंदु है। उनके मुताबिक एआई ने क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं, लेकिन इसके अच्छे और बुरे दोनों परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने चेताया कि दुनिया में पहले से ही परमाणु हथियारों की कमी नहीं है, ऐसे में एआई का दुरुपयोग वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसलिए एआई पर सख्त नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय नियम जरूरी हैं।
चीन-अमेरिका मुकाबला: जमीन नहीं, साइबर स्पेस में असली जंग
चीन और अमेरिका की सैन्य तुलना पर बोलते हुए यान शुएतोंग ने कहा कि दोनों देशों के पास परमाणु शक्ति है, लेकिन पारंपरिक सैन्य तुलना का ज्यादा अर्थ नहीं है। असली प्रतिस्पर्धा साइबर स्पेस में है। उनके मुताबिक भविष्य की लड़ाइयां केवल भौगोलिक सीमाओं पर नहीं, बल्कि डिजिटल और तकनीकी मोर्चों पर लड़ी जाएंगी।
भारत-चीन प्रतिद्वंद्विता पर जॉन मियरशाइमर की टिप्पणी
अमेरिकी राजनीतिक वैज्ञानिक जॉन मियरशाइमर ने कहा कि भारत और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा समय के साथ बढ़ती जा रही है। दोनों देश सैन्य क्षमता और हथियारों के विस्तार में जुटे हैं। उन्होंने आगाह किया कि भारत को दो मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है—उत्तर में चीन और पश्चिम में पाकिस्तान। समुद्री क्षेत्र में भी चीन की बढ़ती नौसैनिक ताकत भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन सकती है।
ट्रंप की शांति नीति और टैरिफ की राजनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक शांति प्रयासों पर मियरशाइमर ने कहा कि ट्रंप मिडिल ईस्ट समेत कई क्षेत्रों में युद्ध खत्म करने की इच्छा रखते हैं और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से संवाद के लिए भी तैयार हैं। हालांकि ईरान से जुड़े तनाव हालात को जटिल बनाते हैं।
टैरिफ नीति पर उन्होंने माना कि अमेरिका अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कड़े कदम उठा रहा है। भारत-अमेरिका संबंधों में टैरिफ के कारण कुछ खटास आई है, लेकिन भविष्य में रिश्तों के सुधरने की संभावना भी जताई।
भारत की संतुलन नीति: नई व्यवस्था में नई पहचान
मियरशाइमर ने यह भी कहा कि भारत ने अमेरिका और रूस दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखकर नई वैश्विक व्यवस्था में अपनी अहम पहचान बनाई है। बदलते वर्ल्ड ऑर्डर में यह कूटनीतिक संतुलन भारत की बड़ी रणनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।