मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और तनाव के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक बाजार को हिला दिया है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने से तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है। यही कारण है कि कई देशों में तेल और गैस संकट की आशंका बढ़ गई है। इसी बीच ईरान की ओर से चेतावनी दी गई कि कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
32 देशों ने मिलकर लिया बड़ा फैसला
तेल संकट की बढ़ती आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के 32 सदस्य देश एक साथ सामने आए हैं। इन देशों ने मिलकर एक बड़ा फैसला लिया है ताकि दुनिया में तेल की कमी को रोका जा सके। एजेंसी ने अपने आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने का फैसला किया है। इस फैसले का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बनी रहे और अचानक संकट की स्थिति पैदा न हो।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ी चिंता
इस पूरे मामले की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य को माना जा रहा है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया भर में समुद्र के रास्ते होने वाले तेल व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यह रास्ता बंद हो जाता है तो कई देशों की ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसी कारण इस इलाके में बढ़ते तनाव ने दुनिया की चिंता और बढ़ा दी है।
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IEA क्या है और क्यों बनाई गई थी
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी एक वैश्विक संगठन है जो ऊर्जा बाजार पर नजर रखता है और देशों को नीतिगत सलाह देता है। इसकी स्थापना साल 1974 में की गई थी। उस समय दुनिया में तेल संकट गहरा गया था और देशों को ऊर्जा सप्लाई को लेकर बेहतर समन्वय की जरूरत महसूस हुई थी। इस संगठन का मुख्यालय फ्रांस की राजधानी पेरिस में है और यह वैश्विक ऊर्जा बाजार से जुड़े आंकड़े और रिपोर्ट जारी करता है।
एजेंसी के पास है बड़ा तेल भंडार
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के पास आपातकालीन स्थिति के लिए बड़ा तेल भंडार मौजूद है। जानकारी के अनुसार एजेंसी के पास 1.2 अरब बैरल से ज्यादा तेल का सार्वजनिक रिजर्व है। इसके अलावा उद्योग भंडार के रूप में करीब 600 मिलियन बैरल तेल अलग से रखा गया है। संकट की स्थिति में इन भंडारों का इस्तेमाल करके बाजार में सप्लाई को संतुलित किया जाता है।
पहले भी कई बार लिया गया ऐसा फैसला
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह आपातकालीन तेल जारी करने का फैसला लिया गया हो। इससे पहले भी दुनिया में संकट की स्थिति आने पर ऐसा कदम उठाया गया है। इतिहास में कई बार एजेंसी ने अपने भंडार से तेल जारी किया है ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तनाव के बीच यह फैसला वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभा सकता है।