.jpg%3Falt%3Dmedia%26token%3Da9f618c5-e65c-4b24-bee7-8983d1d3e47c&w=3840&q=75)
वैज्ञानिक रूप से पूरी दुनिया में एक साथ भूकंप आना संभव नहीं है, क्योंकि भूकंप टेक्टोनिक प्लेट्स के खिसकने से आते हैं और अलग-अलग जगहों पर अलग समय पर आते हैं। लेकिन कल्पना की जाए कि अगर एक ही समय पर पूरी पृथ्वी पर भूकंप आ जाए, तो यह इतिहास की सबसे बड़ी आपदा होगी। हर महाद्वीप, हर शहर और हर महासागर हिलने लगेगा। समुद्रों में विशाल सुनामी उठेगी, जो मुंबई, टोक्यो और न्यूयॉर्क जैसे तटीय शहरों को डुबा देगी। समुद्री जीवन का संतुलन बिगड़ जाएगा और लाखों जलीय जीव नष्ट हो जाएंगे।
धरती का नक्शा बदल जाएगा
ऐसी स्थिति में पहाड़ों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन होगा और हिमालय जैसे पर्वत भी हिल सकते हैं। ज्वालामुखी सक्रिय होकर लावा और जहरीली गैसें छोड़ देंगे, जिससे हवा जहरीली हो जाएगी और आस-पास की जिंदगी समाप्त हो सकती है। इमारतें, पुल और सड़कें पलक झपकते ही ढह जाएंगी। बिजली, पानी और संचार व्यवस्था ठप हो जाएगी। धरती की सतह पर गहरी दरारें पड़ेंगी और नई घाटियां व पहाड़ बन सकते हैं। इसका मतलब है कि पृथ्वी का नक्शा हमेशा के लिए बदल जाएगा।
इंसानी सभ्यता पर खतरा
इतनी बड़ी आपदा से पर्यावरण भी बुरी तरह प्रभावित होगा। धूल और राख आसमान को ढक लेंगी, जिससे सूरज की रोशनी कम हो जाएगी और तापमान तेजी से गिर जाएगा। मौसम का संतुलन बिगड़ जाएगा और कई प्रजातियां विलुप्त हो जाएंगी। इंसानी सभ्यता के सामने खाने, पानी और बिजली जैसी मूलभूत जरूरतों का संकट खड़ा हो जाएगा। भले ही पृथ्वी का कोर और संरचना इतनी मजबूत है कि वह खत्म नहीं होगी, लेकिन सतह पर जीवन तबाह हो जाएगा। कुछ लोग और जीव बच सकते हैं, मगर सामान्य जीवन लौटने में सदियों का समय लग सकता है।