
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का ऐलान आज शाम 4 बजे होने वाला है। चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ ही पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसके लागू होते ही जिला प्रशासन की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। इस दौरान डीएम (जिलाधिकारी) और एसपी (पुलिस अधीक्षक) को कई विशेष अधिकार मिल जाते हैं, जो सामान्य परिस्थितियों में नहीं होते। इनका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो।
डीएम के अधिकार
आचार संहिता लागू होने के बाद डीएम और एसपी सीधे तौर पर चुनाव आयोग के नियंत्रण में आ जाते हैं। अब वे राज्य सरकार नहीं, बल्कि आयोग के आदेशों के अनुसार काम करते हैं। डीएम को मुख्य निर्वाचन अधिकारी की जिम्मेदारी दी जाती है। उसे यह अधिकार होता है कि किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी की ड्यूटी चुनाव कार्य में लगा सके। साथ ही, डीएम को यह शक्ति होती है कि वह आचार संहिता का उल्लंघन करने वालों पर तत्काल कार्रवाई कर सके। अवैध पोस्टर हटवाना, अनधिकृत रैलियां रोकना और प्रचार सामग्री जब्त करना उसके अधिकार क्षेत्र में आता है।
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एसपी की भूमिका
आचार संहिता लागू होते ही जिले की कानून-व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी एसपी के हाथ में आ जाती है। एसपी को यह अधिकार होता है कि वह किसी भी इलाके में धारा 144 लागू कर सके ताकि कोई भी राजनीतिक दल या व्यक्ति माहौल न बिगाड़े। वह संवेदनशील बूथों की सुरक्षा, फ्लैग मार्च और पुलिस बल की तैनाती का निर्णय खुद करता है। साथ ही, डीएम और एसपी यह सुनिश्चित करते हैं कि सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग चुनाव प्रचार में न हो। डीएम जरूरत पड़ने पर किसी अधिकारी का ट्रांसफर या ड्यूटी बदलने की अनुशंसा भी आयोग से कर सकता है। कुल मिलाकर, आचार संहिता लगते ही डीएम और एसपी चुनाव प्रक्रिया के मुख्य नियंत्रक बन जाते हैं, जो निष्पक्ष मतदान की गारंटी सुनिश्चित करते हैं।