मध्यप्रदेश के उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इस बार श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को मैनेज करने की जिम्मेदारी देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIM इंदौर को दी गई है। IIM इंदौर सिंहस्थ के दौरान क्राउड, ट्रैफिक और आपात स्थितियों के लिए रणनीति तैयार कर रहा है। यह रणनीति 5E मॉडल — एजुकेशन, इंफोर्समेंट, इंजीनियरिंग, इनवायरमेंट और इमरजेंसी — पर आधारित होगी। संस्थान प्रयागराज महाकुंभ का अनुभव उज्जैन में लागू करेगा। श्रद्धालुओं के आवागमन, ठहराव और स्नान की समय-सीमा को लेकर भी विश्लेषण किया जाएगा। सिंहस्थ 2028 के लिए यह एक आधुनिक और डेटा-आधारित मैनेजमेंट की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
5E मॉडल से बनेगी मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी
IIM इंदौर सिंहस्थ की योजना 5E सिद्धांत पर तैयार कर रहा है, जिसमें शिक्षा, सुरक्षा, बुनियादी ढांचा, पर्यावरण और आपातकालीन प्रबंधन शामिल हैं। इससे भीड़ नियंत्रित करने और सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिलेगी।
श्रद्धालुओं के मूवमेंट पर खास फोकस
स्टडी में यह देखा जाएगा कि श्रद्धालु कब आते हैं, स्नान में कितना समय लगाते हैं और कब वापस जाते हैं। इससे ट्रैफिक फ्लो और सुविधा व्यवस्था को बेहतर किया जाएगा।
महाकाल मंदिर और ट्रैफिक मैनेजमेंट
महाकाल मंदिर की ओर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर से तीन किलोमीटर पहले ही ट्रैफिक कंट्रोल पॉइंट तैयार करने की योजना है। साथ ही शिप्रा नदी के घाटों को भी सुव्यवस्थित करने की तैयारी है।
प्रयागराज अनुभव से होगा फायदा
IIM इंदौर ने पहले प्रयागराज कुंभ के लिए भी अध्ययन किया था। उसकी रिपोर्ट यूपी सरकार को दी गई थी। उसी अनुभव के आधार पर सिंहस्थ की योजना बेहतर बनाई जाएगी।