Mama of Assam: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को आज सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि ‘असम का मामा’ के रूप में भी जाना जाता है। यह नाम उन्हें किसी राजनीतिक रणनीति से नहीं, बल्कि युवाओं के बीच उनके सहज और संवादात्मक अंदाज से मिला। रैलियों में जब वे खुद को “मामा” कहते हैं, तो भीड़ भी उसी जोश से उन्हें पुकारती है, जिससे उनकी लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
परिवार में भी अलग पहचान
हिमंत बिस्वा सरमा का निजी जीवन भी उतना ही दिलचस्प है। उनकी पत्नी रिनिकी भुयान सरमा पूर्वोत्तर भारत की जानी-मानी मीडिया उद्यमी हैं और ‘News Live’ जैसे बड़े चैनल से जुड़ी हैं। वहीं उनके बेटे नंदिल बिस्वा सरमा एक प्रोफेशनल शूटर हैं, जिन्होंने कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर पहचान बनाई है। परिवार का हर सदस्य अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय और सफल माना जाता है।
पढ़ाई से राजनीति तक का सफर
1 फरवरी 1969 को जोरहाट में जन्मे हिमंत ने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की। छात्र जीवन में वे सक्रिय रूप से राजनीति से जुड़े और बाद में कांग्रेस में शामिल होकर तेजी से आगे बढ़े। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे अहम मंत्रालय संभाले और राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई।
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कांग्रेस से बीजेपी तक बड़ा बदलाव
राजनीतिक जीवन में बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने कांग्रेस छोड़कर 2015 में भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। इस फैसले ने पूर्वोत्तर की राजनीति का समीकरण बदल दिया। उन्हें नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस का संयोजक बनाया गया और वे बीजेपी के प्रमुख रणनीतिकार के रूप में उभरे।
लोकप्रियता का ‘मामा’ फैक्टर
हिमंत की ‘मामा’ वाली छवि सिर्फ एक संबोधन नहीं, बल्कि उनकी राजनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है। खासकर महिलाओं और युवाओं के बीच उनकी योजनाओं और सीधे संवाद ने उन्हें एक भरोसेमंद नेता के रूप में स्थापित किया है। यही वजह है कि आज वे पूर्वोत्तर की राजनीति में सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं।