मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक ने साफ चेतावनी दी है कि यह संकट जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। इससे ईंधन, गैस और उर्वरकों की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
तीसरा बड़ा वैश्विक झटका
विशेषज्ञों के मुताबिक यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए तीसरा बड़ा झटका है। इससे पहले दुनिया कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के असर से जूझ चुकी है। अब नया संकट महंगाई और सप्लाई चेन को फिर से बिगाड़ सकता है, जिससे कई देशों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है।
ऊर्जा और खाद की कीमतों में उछाल
संयुक्त बयान में कहा गया है कि युद्ध के चलते तेल, गैस और उर्वरकों की कीमतों में तेजी आई है। मार्च 2026 में यूरिया की कीमत करीब 46 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। इससे खेती की लागत बढ़ेगी और इसका असर सीधे खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दिखाई देगा।
होर्मुज स्ट्रेट बना चिंता का कारण
होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के कारण तेल आपूर्ति पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इस समुद्री रास्ते से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई करता है। यहां रुकावट का मतलब है कि ऊर्जा संकट और गहराएगा और कीमतें लगातार ऊपर जाएंगी।
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उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर सबसे ज्यादा असर
रिपोर्ट के अनुसार, उभरती अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई का अनुमान 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.9 प्रतिशत कर दिया गया है। सबसे खराब स्थिति में यह 6.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। विकासशील देशों के लिए विकास दर का अनुमान भी घटा दिया गया है, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ेगा।
नौकरियों और पर्यटन पर असर
इस संकट का असर सिर्फ कीमतों तक सीमित नहीं है। युद्ध के चलते कई लोगों को विस्थापित होना पड़ा है, जिससे नौकरियों पर असर पड़ा है। पर्यटन सेक्टर भी प्रभावित हुआ है, जिससे कई देशों की आय घट सकती है और आर्थिक रिकवरी में देरी हो सकती है।
आम आदमी पर सीधा असर
महंगाई बढ़ने का मतलब है कि रोजमर्रा की चीजें महंगी होंगी। खेत में लागत बढ़ेगी तो थाली में खाना भी महंगा होगा। ऐसे में आम आदमी की जेब पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ेगा और जीवन यापन मुश्किल हो सकता है।
आगे की चुनौती
IMF और विश्व बैंक ने संकेत दिए हैं कि यह संकट लंबा चल सकता है। अब सरकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है महंगाई को काबू में रखना और आम लोगों को राहत देना, ताकि आर्थिक संतुलन बना रह सके।