रक्षा क्षेत्र में पिछले एक दशक में किए गए व्यापक सुधारों के चलते भारत सैन्य उपकरणों के उत्पादन और निर्यात के मामले में मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय शक्ति के रूप में उभरा है। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सरकार की ओर से जारी फैक्टशीट के अनुसार, देश का रक्षा उत्पादन 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो 2013-14 में महज 4,746 करोड़ रुपये था।
निर्यात में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई
2025-26 में रक्षा उत्पादन में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत रही, जबकि निजी क्षेत्र ने 24 प्रतिशत योगदान दिया। भारत के रक्षा निर्यात में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। रक्षा निर्यात 2013-14 में 686 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये हो गया। भारतीय सैन्य उपकरणों को अब 80 से अधिक देशों में बाजार मिल रहा है।
50,000 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात
2025-26 में कुल रक्षा निर्यात में निजी क्षेत्र का योगदान 17,353 करोड़ रुपये यानी 45.16 प्रतिशत रहा, जबकि रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने 21,071 करोड़ रुपये यानी 54.84 प्रतिशत का योगदान दिया। केंद्र सरकार ने 2029 तक सालाना 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात हासिल करने का लक्ष्य तय किया है।
विकास के लिए आवंटन भी बढ़ाया
रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास के लिए आवंटन भी बढ़ाया गया है। यह राशि 2014-15 में 13,716.14 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 29,100.25 करोड़ रुपये हो गई है, जो 112 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। वर्ष 2022-23 से रक्षा रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा उद्योग, स्टार्टअप और अकादमिक संस्थानों के लिए खोला गया है, ताकि नवाचार को बढ़ावा देने के साथ रक्षा उत्पादन को आधुनिक बनाया जा सके।
24 प्रयोगशालाओं में उपलब्ध परीक्षण
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की 24 प्रयोगशालाओं में उपलब्ध परीक्षण सुविधाओं को डिफेंस टेस्टिंग पोर्टल (डीटीपी) के जरिए उद्योग के लिए सुलभ बनाया गया है। रक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से घरेलू निर्माता, स्टार्टअप और उद्योग सरकारी परीक्षण सुविधाओं का सशुल्क उपयोग करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।