UP News: प्रदेश में लंबे समय से रुकी शिक्षक भर्तियों को लेकर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की बैठक में अहम फैसले लिए गए हैं। आयोग की हुई बैठक में भर्ती प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने पर सहमति बनी। आयोग ने अपने सभी अभिलेखों और पत्रावलियों को डिजिटल करने का निर्णय लिया है। इससे भर्ती से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और कामकाज में तेजी लाने में मदद मिलेगी।
परीक्षा की तिथियों को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं करेगा
आयोग के जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि बैठक में यह भी तय किया गया कि आयोग द्वारा कराई जाने वाली भर्तियों के हर चरण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी तैयार की जाएगी। यह एसओपी परीक्षा नियंत्रक द्वारा आगामी बैठक में प्रस्तुत की जाएगी। एसओपी तय होने के बाद ही परीक्षा से जुड़ी तारीखों पर निर्णय लिया जाएगा। इससे साफ है कि फिलहाल भर्ती परीक्षा की तिथियों को लेकर आयोग कोई जल्दबाजी नहीं करेगा।
एजेंसियों का पारदर्शी चयन
जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि आयोग ने यह भी निर्णय लिया कि अब तक विभिन्न एजेंसियों के साथ किए गए एमओयू की गहन समीक्षा की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की तकनीकी या प्रशासनिक परेशानी न आए। परीक्षा से जुड़े कार्यों के लिए एजेंसियों का चयन अब पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। इसके लिए आयोग की ओर से विज्ञप्ति जारी की जाएगी।
भर्तियों की कोई डेट न आने से निराशा हुई
साथ ही आयोग के सामान्य कार्यों के लिए एजेंसी का चयन समयबद्ध तरीके से करने पर भी सहमति बनी। इसके अलावा आयोग भवन की स्थिति पर भी बैठक में चर्चा हुई। कई हिस्सों में भवन क्षतिग्रस्त पाए जाने पर मरम्मत, रंगाई-पुताई और साफ-सफाई कराने का निर्णय लिया गया है। आयोग के इन फैसलों से संकेत मिलते हैं कि शिक्षक भर्तियों की प्रक्रिया को दोबारा पटरी पर लाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। हालांकि अभ्यर्थियों को अभी परीक्षा तिथियों के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिरीक्षक रहे प्रशांत कुमार की अध्यक्षता में हुई दूसरी बैठक से अभ्यर्थियों को उम्मीदें थीं, पर भर्तियों की कोई डेट न आने से निराशा हुई है।
24 हजार से अधिक पदों पर होनी हैं नई भर्तियां
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से पीजीटी, टीजीटी और प्रधानाचार्य के 24 हजार से अधिक पदों का अधियाचन तैयार है. आयोग का अधियाचन पोर्टल भी अंतिम चरण में है. इसके अलावा प्राथमिक विद्यालयों में भी लंबे समय से भर्ती नहीं हुई है। इस तरह शिक्षा सेवा चयन आयोग के नए अध्यक्ष प्रशांत कुमार के सामने पुरानी भर्तियों को शीघ्र पूरा करने, रुकी हुई परीक्षाओं को कराने और 24 हजार से अधिक नए पदों पर पारदर्शी तरीके से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की बड़ी जिम्मेदारी है।