पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री Imran Khan की बिगड़ती सेहत ने देश की राजनीति को फिर गरमा दिया है। उनकी आंखों की गंभीर बीमारी और इलाज में कथित देरी को लेकर समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं। इस्लामाबाद से कराची तक विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। अदालत के हस्तक्षेप के बाद सरकार ने विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गठित करने और अस्पताल में समुचित इलाज सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
देशभर में प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे समर्थक
Pakistan Tehreek-e-Insaf (पीटीआई) के कार्यकर्ताओं ने इस्लामाबाद, कराची, स्वाबी और अटॉक सहित कई शहरों में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इस्लामाबाद–रावलपिंडी मार्ग पर टायर जलाकर रास्ता रोका गया, जबकि कराची में बड़ी संख्या में समर्थकों ने सरकार विरोधी नारे लगाए। अटॉक में प्रदर्शनकारियों ने इस्लामाबाद को खैबर पख्तूनख्वाह से जोड़ने वाले पुल को कुछ समय के लिए बंद कर दिया। पार्टी नेताओं ने इसे “स्वास्थ्य के अधिकार” की लड़ाई बताया है।
आंख की बीमारी ने बढ़ाई चिंता
सूत्रों के मुताबिक, पिछले वर्ष अक्टूबर से इमरान खान की दाहिनी आंख में धुंधलापन शुरू हुआ था। लगातार उच्च रक्तचाप के कारण स्थिति बिगड़ती गई। जनवरी में जांच के दौरान केंद्रीय रेटिना शिरा अवरोध (Central Retinal Vein Occlusion) जैसी गंभीर बीमारी की पुष्टि हुई। चिकित्सकों ने इसे दृष्टि के लिए खतरनाक बताया और तत्काल विशेष इलाज की सिफारिश की।
इलाज में देरी पर उठे सवाल
विशेषज्ञों ने अस्पताल में भर्ती कर निगरानी में इलाज की सलाह दी थी, लेकिन अनुमति मिलने में देरी हुई। बाद में उन्हें इस्लामाबाद स्थित Pakistan Institute of Medical Sciences ले जाया गया, जहां आंख में विशेष इंजेक्शन दिया गया। हालांकि, संक्रमण के खतरे की आशंका जताए जाने के बावजूद उन्हें फिर जेल भेज दिया गया। इस फैसले पर समर्थकों ने सवाल खड़े किए हैं।
अदालत के निर्देश के बाद हरकत में सरकार
मामला अदालत तक पहुंचने के बाद Supreme Court of Pakistan ने सरकार को समयबद्ध इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके बाद रावलपिंडी के Al-Shifa Trust Eye Hospital के विशेषज्ञ डॉक्टरों को नई मेडिकल टीम में शामिल किया गया है। सरकार ने दावा किया है कि अब इलाज में कोई लापरवाही नहीं होगी।
सियासत बनाम संवेदनशीलता
इमरान खान की सेहत का मुद्दा अब केवल चिकित्सकीय नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप ले चुका है। समर्थक इसे मानवाधिकार से जोड़ रहे हैं, जबकि सरकार कानूनी प्रक्रिया और सुरक्षा प्रोटोकॉल का हवाला दे रही है। आने वाले दिनों में अदालत की निगरानी और मेडिकल रिपोर्ट से यह तय होगा कि इस विवाद का अगला अध्याय क्या होगा