भारत के सोयामील निर्यातकों के लिए एक बड़ी चिंता की खबर आई है. बांग्लादेश, जो अब तक भारत का सबसे बड़ा खरीदार रहा है, अब अमेरिका से करीब 1 अरब डॉलर (करीब 8,862 करोड़ रुपये) की सोयाबीन खरीदने जा रहा है. अमेरिकी दूतावास के मुताबिक, ढाका की तीन बड़ी सोया-क्रशिंग कंपनियों ने अगले 12 महीनों में अमेरिकी सोयाबीन लेने का करार किया है. इससे भारत के सोयामील शिपमेंट पर सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि बांग्लादेश अब अमेरिकी सप्लायर्स से सस्ती दरों पर खरीद कर रहा है.
भारत से घटा निर्यात, संकट गहराया
भारत से बांग्लादेश को सोयामील का निर्यात 46% घटकर 1.63 लाख टन रह गया है, जो पिछले साल 3.02 लाख टन था. सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी सौपा के कार्यकारी निदेशक डी.एन. पाठक के मुताबिक, बांग्लादेश ने अमेरिका से सस्ती सोयाबीन खरीद शुरू कर दी है, जिससे हमारे निर्यात पर असर पड़ा है अब 1 अरब डॉलर की ये डील भारत के लिए और चिंता की बात है. पाठक ने यह भी कहा कि 2025-26 तेल वर्ष की स्थिति फिलहाल अनिश्चित है. अगर अंतरराष्ट्रीय दाम घटे तो भारत फिर से प्रतिस्पर्धा में लौट सकता है, वरना हालात और बिगड़ सकते हैं.
कीमतों में फर्क बना वजह
भारतीय सोयामील अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 100 डॉलर प्रति टन महंगा पड़ता है, क्योंकि यह नॉन-जीएम (गैर-जेनेटिकली मॉडिफाइड) होता है. जबकि अमेरिका और दक्षिण अमेरिकी देश सस्ते जीएम सोयामील की सप्लाई करते हैं. यही वजह है कि भारत का कुल निर्यात 2024-25 में 5% घटकर 20.23 लाख टन रह गया. ईरान और बांग्लादेश से मांग कमजोर हुई, हालांकि जर्मनी, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देशों से अच्छी डिमांड ने कुछ राहत जरूर दी
यूरोप ने दी थोड़ी राहत
यूरोपीय देशों ने EU Deforestation Regulation (EUDR) लागू होने से पहले भारतीय सोयामील की भारी खरीद की. जर्मनी को निर्यात चार गुना, फ्रांस को तीन गुना और नीदरलैंड को दोगुना से ज्यादा बढ़ गया. SOPA के मुताबिक, भारतीय उद्योग EUDR नियमों के अनुपालन की पूरी तैयारी कर रहा है ताकि यूरोपीय बाजार में पकड़ बनी रहे. हालांकि, बांग्लादेश का रुख अमेरिका की ओर मुड़ना भारत के लिए एक साफ चेतावनी है अगर कीमत और सप्लाई में प्रतिस्पर्धा नहीं बढ़ाई गई, तो पड़ोसी देशों में भारतीय सोयामील की पकड़ कमजोर पड़ सकती है