Donald Trump Tariff: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव के बीच एक दिलचस्प मोड़ सामने आया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान तो कर दिया, लेकिन इसके पीछे एक रणनीतिक नरमी भी दिखी। ट्रंप के हस्ताक्षरित आदेश में डीजल, विमान ईंधन, कच्चा तेल और एलएनजी जैसे पेट्रोलियम उत्पादों को इस टैरिफ से छूट दी गई है। इतना ही नहीं, दवाओं और स्मार्टफोन जैसे प्रमुख उत्पाद भी इससे बाहर हैं। वहीं अब एक बार फिर ट्रेड डील को लेकर वार्ता की नई उम्मीद भी जगी है।
टैरिफ का एलान... लेकिन पेट्रोलियम उत्पादों को राहत!
बुधवार को ट्रंप ने भारत की व्यापारिक नीतियों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। लेकिन जब उनका कार्यकारी आदेश सार्वजनिक हुआ, तो उसमें केवल सीमित वस्तुओं पर ही 25% टैरिफ लगाने की बात थी। खास बात यह रही कि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े डीजल, रिफाइंड फ्यूल, क्रूड ऑयल, एलएनजी और कोयला जैसे उत्पाद इससे बाहर रखे गए। इसके अलावा दवाएं, स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक सामानों को भी राहत दी गई।
ऊर्जा निर्यात को मिलेगा फायदा, अमेरिकी कंपनियों को भी राहत
भारत हर साल अमेरिका को लाखों टन पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात करता है, जिनकी वैल्यू अरबों डॉलर में होती है। ऐसे में इन उत्पादों को टैरिफ से बाहर रखना दोनों देशों के ऊर्जा क्षेत्र के लिए फायदेमंद है। जानकारों का मानना है कि ट्रंप के इस फैसले से भारत को जहां ईंधन निर्यात में नुकसान नहीं होगा, वहीं अमेरिका में भी तेल रिफाइनिंग से जुड़ी कंपनियों को स्थायित्व मिलेगा।
रिकी गिल की भारत यात्रा से बढ़ेगी कूटनीतिक गर्मी
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ट्रंप प्रशासन के दक्षिण एशिया मामलों के वरिष्ठ सलाहकार रिकी गिल अगले हफ्ते भारत आ रहे हैं। वह 5-6 अगस्त को दिल्ली में इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) पर होने वाली अहम बैठक में शामिल होंगे। यह यात्रा हालांकि पहले से तय थी, लेकिन मौजूदा ट्रेड तनाव के बीच इसका राजनीतिक और रणनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है।
रूस-भारत व्यापार पर 'जुर्माने' की धमकी बरकरार
भले ही पेट्रोलियम उत्पादों को राहत मिल गई हो, लेकिन ट्रंप प्रशासन अभी भी भारत के रूस के साथ रक्षा और ऊर्जा व्यापार पर नाराज़ है। ट्रंप ने सार्वजनिक मंच से चेतावनी दी थी कि भारत पर इसके लिए कोई बड़ा जुर्माना लगाया जा सकता है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यह कदम कब और कैसे उठाया जाएगा।
ट्रेड डील की राह फिर से खुलेगी?
रिकी गिल की यात्रा को लेकर भारतीय अधिकारी उम्मीद जता रहे हैं कि इस दौरान अमेरिका के साथ रुकी हुई व्यापारिक बातचीत को फिर से शुरू किया जा सकता है। दोनों देशों के बीच पिछली ट्रेड डील अधूरी रह गई थी, लेकिन मौजूदा रणनीतिक साझेदारी को देखते हुए अब फिर से दरवाजे खुलने की संभावना है।