India 100 Percent Tariff Risk : अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव को कुछ और समय के लिए टाल दिया गया है। दोनों देशों ने बुसान व्यापार समझौते से जुड़ी टैरिफ रोक को 10 जनवरी 2027 तक बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसी बीच Global Trade Research Initiative यानी GTRI ने आशंका जताई है कि चीन को मिली यह राहत रूस से तेल खरीदने वाले भारत पर अमेरिकी दबाव बढ़ा सकती है। हालांकि, अमेरिका ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने का कोई फैसला अभी नहीं किया है।
चीन को मिली टैरिफ से राहत
अमेरिका और चीन के बीच बुसान में बनी व्यापारिक सहमति के तहत टैरिफ बढ़ोतरी पर रोक को 10 जनवरी 2027 तक बढ़ाया गया है। यह रोक पहले 10 नवंबर 2026 को खत्म होने वाली थी। इस अवधि में दोनों देशों के बीच नए द्विपक्षीय टैरिफ और कुछ प्रतिबंधात्मक कदमों को टालने की व्यवस्था जारी रहेगी। यह समझौता अक्टूबर 2025 में डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद सामने आया था।
भारत-चीन पर रूसी तेल का दबाव
भारत और चीन दोनों रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदार हैं। इसी वजह से रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिकी नीति का असर दोनों देशों पर पड़ सकता है। GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का कहना है कि चीन को व्यापारिक मोर्चे पर मिली अतिरिक्त राहत के कारण भारत पर अमेरिकी दबाव का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, यह GTRI का विश्लेषण है, न कि अमेरिका की ओर से भारत को लेकर घोषित कोई नई नीति।
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100% Tariff का अधिकार मिला
18 सितंबर को राष्ट्रपति ट्रंप ने Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 पर हस्ताक्षर किए। कानून अमेरिका को रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। कानून के तहत यह अधिकार स्वतः भारत या किसी अन्य देश पर शुल्क लागू नहीं करता, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति को परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई करने की शक्ति देता है।
भारत के लिए आगे क्या चुनौती
GTRI का मानना है कि अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता के दौरान रूसी तेल का मुद्दा दबाव बनाने वाले प्रमुख विषयों में शामिल हो सकता है। भारत के लिए चुनौती यह है कि रूसी कच्चा तेल उसकी ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जबकि अमेरिका के नए कानून में बड़े रूसी ऊर्जा खरीदारों पर संभावित शुल्क का प्रावधान है। फिलहाल ऐसा कोई आदेश नहीं है जिसके तहत भारत पर 100% टैरिफ लगा दिया गया हो। इसलिए आगे की स्थिति अमेरिकी प्रशासन के फैसलों और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की दिशा पर निर्भर करेगी।