प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों पांच देशों की अहम कूटनीतिक यात्रा पर हैं और संयुक्त अरब अमीरात के बाद अब उनका अगला पड़ाव नीदरलैंड बना है। हेग में भारतीय समुदाय के बीच पीएम मोदी के संबोधन ने वहां मौजूद लोगों में खास उत्साह पैदा किया। इसी बीच कई लोगों के मन में एक सवाल तेजी से उठने लगा कि आखिर नीदरलैंड में भारतीय रुपये की कितनी कीमत है और वहां ₹500 की वैल्यू कितनी बनती है। यही वजह है कि अब वहां की मुद्रा को लेकर चर्चा भी बढ़ गई है।
नीदरलैंड में चलती है ये करेंसी
बहुत से लोग मानते हैं कि हर देश की अपनी अलग मुद्रा होती है, लेकिन नीदरलैंड का मामला थोड़ा अलग है। नीदरलैंड यूरोपीय संघ के यूरोजोन का हिस्सा है और यहां आधिकारिक तौर पर यूरो का इस्तेमाल किया जाता है। यानी वहां अलग राष्ट्रीय मुद्रा नहीं चलती बल्कि यूरो ही सभी लेनदेन का आधार है। यही कारण है कि भारत से वहां जाने वाले लोग रुपये को यूरो में बदलकर इस्तेमाल करते हैं।
भारत के ₹500 की कितनी वैल्यू
मौजूदा विनिमय दर के हिसाब से भारत के ₹500 की कीमत लगभग 4.49 यूरो के आसपास बताई जा रही है। यानी अगर कोई भारतीय यात्री नीदरलैंड जाता है तो वहां ₹500 के बदले उसे करीब साढ़े चार यूरो मिल सकते हैं। हालांकि विदेशी मुद्रा की दरें लगातार बदलती रहती हैं, इसलिए यह कीमत समय के साथ ऊपर या नीचे जा सकती है।
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यूरो क्यों माना जाता है मजबूत
यूरो को दुनिया की सबसे प्रभावशाली मुद्राओं में गिना जाता है। अमेरिकी डॉलर के बाद इसे वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत और सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली रिजर्व मुद्राओं में शामिल किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार, बैंकिंग और निवेश के क्षेत्र में यूरो की बड़ी भूमिका है। अभी एक यूरो की कीमत करीब ₹111 से ₹112 के बीच मानी जा रही है।
पहले अलग थी नीदरलैंड की मुद्रा
यूरो आने से पहले नीदरलैंड में डच गिल्डर नाम की मुद्रा इस्तेमाल होती थी। बाद में यूरोपीय आर्थिक व्यवस्था के तहत देश ने 1999 में डिजिटल लेनदेन के लिए यूरो अपनाया और वर्ष 2002 में नोट और सिक्कों के रूप में इसे पूरी तरह लागू कर दिया गया। इसके बाद डच गिल्डर इतिहास का हिस्सा बन गई।
21 देशों में चलता है यूरो
यूरो सिर्फ नीदरलैंड तक सीमित नहीं है। यूरोपीय संघ के 21 देशों में यही आधिकारिक मुद्रा है और इन्हें सामूहिक रूप से यूरोजोन कहा जाता है। इसकी खास बात यह है कि नोट सभी देशों में एक जैसे होते हैं जबकि सिक्कों पर हर देश अपनी अलग पहचान भी दिखाता है। यही वजह है कि यूरो दुनिया की सबसे अनोखी साझा मुद्राओं में शामिल है।