
भारत ने शुक्रवार को बांग्लादेश के गृह सलाहकार जाहंगीर आलम चौधरी के हालिया बयान पर कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को अपने अंदर झांकना चाहिए। देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे हमलों की गंभीरता से जांच करनी चाहिए।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम रही
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने एक प्रेस ब्रीफिंग में जानकारी दी, “हम इन झूठे और बेबुनियाद आरोपों को सख्ती से खारिज करते हैं। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह से नाकाम रही है। अक्सर अपनी नाकामियों से ध्यान को भटकाने के लिए दूसरों पर आरोप लगाती है। उसे चाहिए कि वह आत्ममंथन करे और चिटगांव हिल ट्रैक्ट्स में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ स्थानीय चरमपंथियों की ओर से की जा रही हिंसा, आगजनी और भूमि कब्जे को लेकर गंभीरता से जांच करे।” यह प्रतिक्रिया चौधरी से उस बयान पर आई, जिसमें उन्होंने खगड़ाछड़ी जिले में फैली अशांति को लेकर नई दिल्ली को जिम्मेदार ठहराया था।
लूटपाट और अंधाधुंध गोलीबारी के आरोप लगे
चिटगांव हिल ट्रैक्ट्स में आदिवासी लोगों के खिलाफ हिंसा हुई। इसे लेकर वैश्विक समुदाय में चिंता बढ़ गई है। मानवाधिकार संगठनों ने अंतरिम सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है, 28 सितंबर को एक मर्मा समुदाय की स्कूली छात्रा से गैंगरेप की घटना सामने आने के हिसा भड़क गई। इसमे कई लोगों की मौत और घायल होने की सूचना है। इस दौरान सुरक्षा बलों पर व्यापक आगजनी, लूटपाट और अंधाधुंध गोलीबारी के आरोप लगाए गए।
इस बीच, जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के बाहर इंटरनेशनल फोरम फॉर सेक्युलर बांग्लादेश ने दो दिवसीय पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन किया। यह प्रदर्शनी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 60वें सत्र के दौरान हुई। इसमें 30 पैनलों के माध्यम से बांग्लादेश में बढ़ते कट्टरपंथ, सांप्रदायिक हिंसा, अल्पसंख्यक उत्पीड़न को सामने लाया गया।