भारत के फार्मा सेक्टर से जुड़ी एक अहम जानकारी सामने आई है, जो देश की दवा उद्योग क्षमता को नई दिशा देती है। केमिकल्स और फर्टिलाइजर्स मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में भारत का एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) निर्यात करीब 41,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा देश के कुल API आयात 39,215 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है, जिससे साफ होता है कि भारत अब इस क्षेत्र में तेजी से मजबूत हो रहा है।
राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़े
राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान मंत्री जेपी नड्डा ने API से जुड़े आयात और निर्यात के आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि भारत का API आयात 2022-23 में 36,229 करोड़ रुपये, 2023-24 में 37,721 करोड़ रुपये और 2024-25 में 39,214 करोड़ रुपये रहा। वहीं पिछले वित्त वर्ष में API का निर्यात बढ़कर करीब 41,493 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो आयात से अधिक है।
चीन से आयात अभी भी बड़ा हिस्सा
हालांकि API के आयात में चीन की हिस्सेदारी अभी भी काफी बड़ी है। आंकड़ों के मुताबिक 2022-23 में चीन से 25,551 करोड़ रुपये, 2023-24 में 27,055 करोड़ रुपये और 2024-25 में करीब 29,064 करोड़ रुपये का आयात किया गया। इससे चीन का हिस्सा 2022-23 के 70 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 74 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसके बावजूद भारत का कुल निर्यात आयात से अधिक होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
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PLI स्कीम से बढ़ रही घरेलू उत्पादन क्षमता
सरकार ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना शुरू की है, जिसके लिए करीब 6,940 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना का उद्देश्य जरूरी केमिकल्स, ड्रग इंटरमीडिएट्स और API की देश में ही मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाना है, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
41 में से 28 अहम उत्पादों का उत्पादन शुरू
PLI योजना के तहत पहचाने गए 41 जरूरी उत्पादों में से 28 के लिए लगभग 56,800 टन सालाना घरेलू उत्पादन क्षमता विकसित की गई है। इस योजना के तहत दिसंबर 2025 तक करीब 2,720 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गई, जिसमें लगभग 527.96 करोड़ रुपये का निर्यात भी शामिल है। इससे लगभग 2,192 करोड़ रुपये के आयात की जरूरत कम हुई है।
रोजगार और निर्यात दोनों को मिला बढ़ावा
सरकार के अनुसार इस योजना से फार्मा सेक्टर में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। दिसंबर 2025 तक करीब 4,896 लोगों को रोजगार मिला है। सरकार का कहना है कि PLI जैसी योजनाओं के जरिए भारत को फार्मास्युटिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।