India Asian Games Five Stars : एशियन गेम्स 2026 में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 85 मेडल जीते और मेडल तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। हर खिलाड़ी ने देश के लिए अपना सबकुछ झोंक दिया। लेकिन पांच ऐसे खिलाड़ी रहे जिनकी कहानी सबसे ज्यादा चर्चा में रही। इन खिलाड़ियों ने सिर्फ मेडल नहीं जीते, बल्कि अपने संघर्ष से भी लोगों का दिल जीत लिया।
बीमारी से लड़कर जीती बड़ी जंग
नीरू ढांडा एशियन गेम्स की सबसे बड़ी स्टार में से एक रहीं। ट्रैप शूटिंग में उन्होंने दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल अपने नाम किया। सबसे हैरानी की बात यह रही कि खेल शुरू होने से कुछ दिन पहले तक वह अस्पताल में भर्ती थीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और शानदार प्रदर्शन करके पूरे देश को गर्व महसूस कराया।
कोरिया का टूटा सालों पुराना रिकॉर्ड
17 साल की कुमकुम महोद ने भी सबको प्रभावित किया। उन्होंने दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीता। महिला रिकर्व आर्चरी टीम ने फाइनल में दक्षिण कोरिया को हराकर इतिहास रच दिया। कोरिया की टीम दशकों से इस खेल में दबदबा बनाए हुए थी। ऐसे में भारतीय टीम की यह जीत किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं मानी जा रही।
पीछे रहकर भी जीत लिया मुकाबला
कुश्ती में सुजीत कलकल ने कमाल कर दिया। फाइनल मुकाबले में वह 9-2 से पीछे थे। ऐसा लग रहा था कि मैच हाथ से निकल गया है। लेकिन उन्होंने शानदार वापसी की और मुकाबला 10-9 से जीत लिया। इससे पहले उन्होंने सेमीफाइनल में मौजूदा ओलंपिक चैंपियन को भी हराया था।
मुश्किल हालात में नहीं मानी हार
विथ्या रामराज की कहानी भी लोगों को प्रेरित करती है। ट्रक ड्राइवर की बेटी विथ्या ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीते। आर्थिक परेशानियां उनके रास्ते में कई बार आईं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनकी मेहनत आज लाखों युवाओं के लिए मिसाल बन चुकी है।
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आखिर क्यों कहलाए भारत के पंच रत्न
इस सूची में पांचवां नाम महिला हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे का है। उनकी कप्तानी में भारत ने 44 साल बाद एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता। इन पांचों खिलाड़ियों की सबसे बड़ी खासियत यही रही कि इन्होंने मुश्किल हालात को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। किसी ने बीमारी को हराया, किसी ने दुनिया की सबसे मजबूत टीम को, तो किसी ने गरीबी और संघर्ष को मात दी। यही वजह है कि ये पांचों भारत के असली 'पंच रत्न' कहलाने के हकदार हैं।