India-Austria relations: ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर की भारत यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई मजबूती दी है। चार दशकों से अधिक समय बाद किसी ऑस्ट्रियाई चांसलर का यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा में व्यापार, तकनीक और प्रतिभा यानी 3Ts को सहयोग का मुख्य आधार बनाया गया है, जिससे द्विपक्षीय रिश्तों को नई दिशा मिली है।
व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
भारत और ऑस्ट्रिया के बीच मौजूदा व्यापार लगभग 3.5 अरब डॉलर का है, जिसे बढ़ाने पर जोर दिया गया है। प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के बाद इसमें और तेजी आने की उम्मीद है। ऑस्ट्रियाई कंपनियां भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे और मैन्युफैक्चरिंग में निवेश बढ़ाने की योजना बना रही हैं।
समझौतों पर बनी सहमति
इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए हैं। इनमें ऑडियो-विजुअल को-प्रोडक्शन, खाद्य सुरक्षा, निवेश, रक्षा सहयोग, काउंटर-टेररिज्म और स्किल डेवलपमेंट शामिल हैं। इसके अलावा साइबर सुरक्षा, स्टार्टअप और शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है।
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मजबूत साझेदारी
भारत और ऑस्ट्रिया ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने का फैसला किया है। इसके तहत एक संयुक्त कार्य समूह बनाया जाएगा, जो तकनीक, प्रशिक्षण और रक्षा उद्योग पर काम करेगा। साथ ही हाई-टेक क्षेत्रों जैसे क्वांटम टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा में भी साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा।
शिक्षा के लिए नए अवसर
इस यात्रा से युवाओं और पेशेवरों के लिए नए अवसर खुलेंगे। वर्किंग हॉलिडे प्रोग्राम और माइग्रेशन समझौते के तहत भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स को ऑस्ट्रिया में काम और पढ़ाई के मौके मिलेंगे। साथ ही शिक्षा और तकनीकी सहयोग के जरिए दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध और मजबूत होंगे।