Seawater Lithium Extraction : इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बढ़ती मांग के बीच भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो आने वाले समय में बैटरी की दुनिया बदल सकती है। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) के वैज्ञानिकों ने समुद्र के पानी से लिथियम निकालने का नया तरीका खोजा है। लिथियम वही धातु है, जिसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक कारों, मोबाइल फोन और दूसरी रिचार्ज होने वाली बैटरियों में होता है। इस तकनीक से भारत को लिथियम के नए स्रोत का रास्ता मिल सकता है।
भारतीय वैज्ञानिकों ने कैसे किया कमाल
बीएआरसी के वैज्ञानिकों ने समुद्री पानी से लिथियम अलग करने के लिए एक खास रासायनिक तरीका तैयार किया है। इसमें पहले पानी से मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे दूसरे तत्वों को हटाया जाता है। इसके बाद खास रसायनों और एक विलायक की मदद से लिथियम को अलग किया जाता है। इस प्रक्रिया की खास बात यह है कि इसमें पहले के कई तरीकों के मुकाबले कम विलायक का इस्तेमाल होता है। इससे आगे चलकर लागत कम करने की संभावना बन सकती है।
प्रयोग में करीब 90 प्रतिशत लिथियम निकालने में सफलता
इस नई तकनीक के प्रयोगशाला परीक्षण में वैज्ञानिकों को समुद्री पानी में मौजूद करीब 90 प्रतिशत लिथियम निकालने में सफलता मिली। खास बात यह भी रही कि विलायक को दोबारा इस्तेमाल करने के परीक्षण में पांच चक्रों तक लिथियम निकालने की दर लगभग 90 प्रतिशत बनी रही। यह नतीजा इस तकनीक को लेकर उम्मीद बढ़ाता है। हालांकि, यह सफलता अभी प्रयोगशाला के परीक्षणों तक सीमित है। इसे बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने के लिए आगे और काम करना होगा।
इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी पर क्या होगा असर
भारत लिथियम और बैटरी से जुड़ी कई जरूरी चीजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है। ऐसे में अगर समुद्र से लिथियम निकालना सस्ता और आसान हो जाता है, तो देश को फायदा मिल सकता है। इससे इलेक्ट्रिक गाड़ियों और ऊर्जा जमा करने वाली बैटरियों के लिए कच्चे माल के नए विकल्प मिल सकते हैं। भविष्य में इससे बैटरी बनाने की लागत कम होने की उम्मीद भी की जा सकती है। लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस तकनीक से इलेक्ट्रिक कारें तुरंत सस्ती हो जाएंगी।
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बाजार तक पहुंचने से पहले अभी बाकी हैं चुनौतियां
इस तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर लाने से पहले कई सवालों के जवाब जरूरी हैं। समुद्र के पानी में लिथियम बहुत कम मात्रा में मौजूद होता है, इसलिए बड़ी मात्रा में पानी को साफ करके उससे लिथियम निकालना आसान नहीं होगा। इसके अलावा बिजली की जरूरत, रसायनों का खर्च, विलायक की भरपाई और समुद्री पर्यावरण पर असर की जांच भी करनी होगी। वैज्ञानिकों की यह खोज जरूर उम्मीद जगाती है, लेकिन असली सफलता तब होगी जब इसे कम खर्च में बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा सके।