ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच राजनाथ सिंह का बयान चर्चा में है। जर्मनी में उन्होंने साफ कहा कि भारत ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश की थी, लेकिन हर प्रक्रिया का एक सही समय होता है। उनका कहना था कि कभी-कभी हालात ऐसे होते हैं कि तुरंत समाधान संभव नहीं होता, लेकिन भविष्य में भारत की भूमिका अहम हो सकती है। उन्होंने संकेत दिए कि अगर सही समय आया तो भारत शांति स्थापना में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
पीएम मोदी की सक्रिय कूटनीति
रक्षामंत्री ने यह भी बताया कि नरेंद्र मोदी ने इस मामले में व्यक्तिगत स्तर पर पहल की थी। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेशकियान से फोन पर बात कर तनाव कम करने की अपील की थी। राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण हमेशा संतुलित और शांति पर आधारित रहता है, जिससे भारत की वैश्विक छवि एक जिम्मेदार देश के रूप में मजबूत होती है।
इस्लामाबाद में बेनतीजा बातचीत
ईरान और अमेरिका के बीच 8 अप्रैल को सीजफायर हुआ था, जिसके बाद 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत हुई। अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व जेडी वेंस कर रहे थे, जबकि ईरान की ओर से मोहम्मद बाघेर गालिबाफ मौजूद थे। करीब 21 घंटे चली इस बातचीत के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका और दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम रहे।
अन्य देशों की भूमिका और चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किए जैसे देश भी मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी प्रयास से स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। ऐसे में भारत की संभावित भूमिका पर नजरें टिकी हैं, क्योंकि भारत दोनों देशों के साथ संतुलित संबंध रखता है और उसकी कूटनीतिक विश्वसनीयता मजबूत मानी जाती है।
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आगे क्या हो सकता है
राजनाथ सिंह के बयान से साफ है कि भारत फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सही समय का इंतजार कर रहा है। अगर परिस्थितियां अनुकूल होती हैं, तो भारत शांति वार्ता में सक्रिय भूमिका निभा सकता है। फिलहाल यह साफ है कि पश्चिम एशिया का यह संकट जल्द खत्म होने वाला नहीं है, लेकिन भारत अपनी कूटनीतिक ताकत के जरिए समाधान का रास्ता तलाशने की कोशिश जारी रखे हुए है।