सरकार घरेलू उत्पादन को तेज करने और विदेशों पर निर्भरता घटाने के लिए बजट में बड़ा कदम उठा सकती है। संकेत हैं कि करीब तेईस हजार करोड़ रुपये का विशेष प्रोत्साहन पैकेज लाया जा सकता है। इसका मकसद देश में ही उन्नत तकनीक वाले पूंजीगत सामान तैयार करना और आयात की जरूरत को कम करना है। अगर यह घोषणा होती है तो स्वदेशी उद्योग को नई रफ्तार मिल सकती है।
निर्माण उपकरणों पर खास जोर
इस प्रस्तावित पैकेज का बड़ा हिस्सा निर्माण उपकरणों के लिए तय किया गया है। बताया जा रहा है कि चौदह से सोलह हजार करोड़ रुपये का कार्यक्रम लगभग तैयार है। इसके तहत बड़ी और जटिल मशीनों का निर्माण देश में ही किया जाएगा, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी।
टनल बोरिंग मशीन बनी चिंता की वजह
टनल बोरिंग मशीन जैसे भारी उपकरणों के लिए भारत अब तक चीन, जापान और कुछ यूरोपीय देशों पर निर्भर रहा है। कुछ समय पहले चीन ने इन मशीनों के निर्यात पर रोक लगा दी थी, जिससे कई परियोजनाएं अटक गई थीं। अब सरकार चाहती है कि ऐसी अहम मशीनें देश में ही बनें ताकि भविष्य में किसी देश के फैसले से भारत की रफ्तार न रुके।
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हाई टेक पुर्जों का स्वदेशीकरण
इन मशीनों में इस्तेमाल होने वाले कई अहम पुर्जे अब भी बाहर से आते हैं। इनमें हाइड्रोलिक सिस्टम, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट और टेलीमैटिक्स जैसे हिस्से शामिल हैं। नई योजना का उद्देश्य इन पुर्जों का उत्पादन देश में बढ़ाना है, जिससे पूरी मशीन आयात करने की जरूरत कम हो सके।
ऑटोमोबाइल सेक्टर को भी सहारा
सरकार ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए भी अलग से योजना पर काम कर रही है। करीब सात हजार करोड़ रुपये की इस योजना का लक्ष्य आधुनिक कार तकनीक को देश में बनाना है। इसमें उन्नत ड्राइविंग सहायता सिस्टम, चारों ओर देखने वाले कैमरे और स्मार्ट सेंसर शामिल हैं। इससे घरेलू उद्योग मजबूत होगा और निर्यात के रास्ते भी खुलेंगे।
आगे क्या बदलेगा
नई योजनाओं में मशीनें बनाने के लिए जरूरी औजारों पर सब्सिडी और परीक्षण केंद्रों की स्थापना भी शामिल हो सकती है। इससे कंपनियों को नए उत्पाद विकसित करने में आसानी होगी। कुल मिलाकर सरकार का फोकस साफ है, देश में उत्पादन बढ़ाना, रोजगार पैदा करना और भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाना। बजट में होने वाला ऐलान इस दिशा में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।