भारत के ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 2019 के बाद पहली बार भारत ने ईरानी कच्चा तेल खरीदा है। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 50 लाख बैरल ईरानी क्रूड की खरीद कर एक अहम कदम उठाया है, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल बढ़ा दी है।
छूट मिलते ही हुआ बड़ा सौदा
यह खरीद अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली 30 दिन की अस्थायी छूट के बाद की गई है। ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में यह राहत दी थी, जिसके तहत पहले से जहाजों पर लदे ईरानी तेल को बाजार में बेचने की अनुमति दी गई। इसी मौके का फायदा उठाते हुए रिलायंस ने यह सौदा किया।
कहां से खरीदा गया तेल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कच्चा तेल नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी से खरीदा गया है। इसकी कीमत ब्रेंट क्रूड के मुकाबले करीब 7 डॉलर प्रति बैरल प्रीमियम पर तय हुई है। हालांकि इसकी डिलीवरी कब होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
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2019 के बाद पहली खरीद
मई 2019 में अमेरिका द्वारा ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लगाने के बाद भारत ने ईरानी तेल का आयात पूरी तरह बंद कर दिया था। इसके बाद से ईरानी तेल मुख्य रूप से चीन जैसे देशों को बेचा जा रहा था। ऐसे में यह सौदा भारत के लिए एक बड़ी वापसी माना जा रहा है।
ऊर्जा रणनीति में बदलाव के संकेत
रिलायंस का यह कदम संकेत देता है कि भारतीय रिफाइनरियां अब बदलते वैश्विक हालात के अनुसार अपनी रणनीति में बदलाव कर रही हैं। हाल के दिनों में भारत ने बड़ी मात्रा में रूसी तेल भी खरीदा है, जिससे सप्लाई सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
वैश्विक बाजार पर क्या असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी छूट का मकसद तेल की कीमतों को नियंत्रित करना है, लेकिन सप्लाई में बहुत बड़ा उछाल फिलहाल नहीं दिखेगा। चीन अभी भी ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है, जबकि नए खरीदारों के सामने भुगतान और शिपिंग जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।