इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच तेज होते सैन्य टकराव ने पूरे मिडिल ईस्ट को अस्थिर कर दिया है। खाड़ी देशों पर हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। इसी संवेदनशील समय में भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कूटनीतिक पहल करते हुए इजराइल और यूएई के शीर्ष नेतृत्व से सीधे बातचीत की और क्षेत्र में तत्काल संघर्ष विराम, नागरिकों की सुरक्षा और स्थिरता की अपील की।
नेतन्याहू से बातचीत में शांति पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से फोन पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने मौजूदा सैन्य हालात पर भारत की गंभीर चिंता व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और हिंसा का सिलसिला जल्द थमना जरूरी है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह किया।
यूएई के राष्ट्रपति से भी की अहम चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan से भी बात की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा संदेश में उन्होंने यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और जानमाल के नुकसान पर दुख जताया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत इस कठिन समय में यूएई के साथ खड़ा है। साथ ही वहां रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आभार भी जताया।
मिडिल ईस्ट में कैसे बिगड़े हालात
तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ईरान को निशाना बनाया। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत की खबर के बाद हालात और भड़क गए। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र के कई ठिकानों की ओर मिसाइलें दागीं। इस घटनाक्रम से पूरे मिडिल ईस्ट में व्यापक युद्ध की आशंका गहराती जा रही है।
खाड़ी देशों पर हमले और बढ़ती चिंता
ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन और कतर जैसे देशों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर बनाए हुए है। वैश्विक बाजारों और ऊर्जा आपूर्ति पर भी इसका असर पड़ने लगा है, जिससे आर्थिक अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है।
भारत का संतुलित और कूटनीतिक रुख
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम में संतुलित रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। भारत संवाद, कूटनीति और क्षेत्रीय स्थिरता का समर्थन करता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की यह पहल न केवल रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि खाड़ी क्षेत्र में बसे लाखों भारतीयों की सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद जरूरी है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।