BRICS के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत के सामने वैश्विक स्तर पर अपनी कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर है। अमेरिकी विदेश नीति विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन का मानना है कि भारत BRICS के मंच का इस्तेमाल ग्लोबल साउथ के देशों की चिंताओं और प्राथमिकताओं को प्रभावी ढंग से दुनिया के सामने रखने के लिए कर सकता है। उनके मुताबिक, बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत एक ऐसे देश के रूप में उभर रहा है, जो विकसित देशों और विकासशील दुनिया, दोनों के साथ संवाद बनाए रखने की क्षमता रखता है। ऐसे में BRICS भारत की रणनीतिक और कूटनीतिक पहुंच को विस्तार देने का अहम माध्यम बन सकता है।
ग्लोबल साउथ की आवाज बनने का अवसर
कुगेलमैन के अनुसार BRICS भारत को विकासशील देशों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से उठाने का अवसर देता है। आर्थिक विकास, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, विकास वित्त और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे विषय ग्लोबल साउथ के लिए लगातार अहम बने हुए हैं। भारत पहले भी विकासशील देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व देने की जरूरत पर जोर देता रहा है। ऐसे में BRICS के जरिए भारत इन देशों की साझा चिंताओं को अधिक प्रभावी तरीके से सामने रख सकता है और अपनी नेतृत्वकारी भूमिका को मजबूत कर सकता है।
पश्चिम और ग्लोबल साउथ के बीच संतुलन
भारत की विदेश नीति में रणनीतिक संतुलन को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ भारत के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं, वहीं रूस और अन्य विकासशील देशों के साथ भी उसके महत्वपूर्ण रिश्ते हैं। यही संतुलन भारत को BRICS में एक अलग स्थिति प्रदान करता है। कुगेलमैन के आकलन के मुताबिक, भारत अपनी इस स्थिति का इस्तेमाल विभिन्न देशों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने के लिए कर सकता है। यदि नई दिल्ली अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच सहमति बनाने में सफल रहती है, तो वैश्विक कूटनीति में उसकी भूमिका और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं।
BRICS के विस्तार ने बढ़ाई भारत की जिम्मेदारी
BRICS के विस्तार के बाद समूह का दायरा पहले की तुलना में काफी व्यापक हुआ है। नए सदस्य देशों के आने से संगठन में आर्थिक और राजनीतिक विविधता बढ़ी है, लेकिन इसके साथ अलग-अलग देशों की प्राथमिकताओं को एक मंच पर लाने की चुनौती भी बढ़ी है। भारत के सामने अब यह अवसर है कि वह अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ ग्लोबल साउथ के व्यापक हितों के बीच संतुलन कायम करे। आर्थिक सहयोग, व्यापार, विकास और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर साझा सहमति बनाने में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
वैश्विक व्यवस्था में बढ़ सकता है भारत का प्रभाव
BRICS के मंच पर भारत की सक्रियता उसकी व्यापक विदेश नीति का हिस्सा है, जिसमें रणनीतिक स्वायत्तता और बहुपक्षीय सहयोग पर जोर दिया जाता है। कुगेलमैन की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक राजनीति में शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है और विकासशील देश अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अपनी आवाज को अधिक प्रभावी बनाना चाहते हैं। यदि भारत BRICS के भीतर सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और ग्लोबल साउथ के साझा मुद्दों को प्राथमिकता दिलाने में सफल होता है, तो वह आने वाले समय में विकासशील दुनिया की एक प्रमुख आवाज के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।