अमेरिका के टैरिफ दबाव और बदलते वैश्विक व्यापार समीकरणों के बीच कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का भारत दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में आए तनाव के बाद यह यात्रा रिश्तों की नई शुरुआत का संकेत दे रही है। 27 फरवरी से 2 मार्च तक प्रस्तावित इस दौरे में व्यापार, निवेश, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग प्रमुख एजेंडा होंगे।
ट्रंप टैरिफ के बाद नए बाजारों की तलाश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने कनाडा पर खासा असर डाला है। स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो सेक्टर में बढ़े आयात शुल्क ने कनाडाई निर्यात को चुनौती दी है। ऐसे में ओटावा अब वैकल्पिक और भरोसेमंद बाजारों की तलाश में है। भारत, अपनी विशाल उपभोक्ता क्षमता और तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के कारण, कनाडा के लिए एक स्वाभाविक साझेदार बनकर उभरा है।
कार्नी का पहला आधिकारिक भारत दौरा
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 27 फरवरी को मुंबई पहुंचेंगे और 2 मार्च तक भारत में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। 1 मार्च को वे नई दिल्ली आएंगे और 2 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के सीईओ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, वित्तीय विशेषज्ञ, इनोवेटर्स और भारत में निवेश कर रहे कनाडाई पेंशन फंड्स के साथ भी बैठकें तय हैं।
ट्रूडो काल के तनाव के बाद रिश्तों की मरम्मत
पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में भारत-कनाडा संबंधों में खटास देखी गई थी। हालांकि, दोनों देशों के व्यापारिक संबंध पूरी तरह प्रभावित नहीं हुए। अब कार्नी का यह दौरा राजनीतिक मतभेदों को पीछे छोड़ आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता देने का संकेत माना जा रहा है।
8 अरब डॉलर से अधिक का द्विपक्षीय व्यापार
भारत और कनाडा के बीच व्यापार लगातार मजबूत रहा है। वित्त वर्ष 2022-23 में द्विपक्षीय व्यापार 8.3 अरब डॉलर था, जो 2023-24 में बढ़कर 8.4 अरब डॉलर और 2024-25 में लगभग 8.8 अरब डॉलर तक पहुंचा। हालांकि 2025-26 में इसमें कुछ गिरावट आई और यह करीब 7.2–7.5 अरब डॉलर के बीच रहा।
भारत कनाडा को रत्न-ज्वेलरी, फार्मास्युटिकल उत्पाद, रेडीमेड गारमेंट्स, मैकेनिकल उपकरण और केमिकल्स निर्यात करता है। वहीं कनाडा से भारत कागज, लकड़ी का गूदा, पोटाश, आयरन स्क्रैप, कॉपर, मिनरल्स और औद्योगिक रसायन आयात करता है।
किन मुद्दों पर रहेगा फोकस?
दौरे के दौरान ट्रेड और इन्वेस्टमेंट के अलावा ऊर्जा सहयोग, क्रिटिकल मिनरल्स, एग्रीकल्चर, एजुकेशन, रिसर्च और इनोवेशन पर विशेष चर्चा होने की उम्मीद है। वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में दोनों देश सप्लाई चेन मजबूत करने और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने पर सहमत हो सकते हैं।