Cash Demand UPI Growth : भारत में नोटबंदी के करीब एक दशक बाद देश की भुगतान व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जहां 2016 में नोटों की अचानक कमी के कारण लोगों और कारोबारियों को डिजिटल भुगतान अपनाना पड़ा था, वहीं आज UPI रोजमर्रा के लेन-देन का अहम हिस्सा बन चुका है। इसके बावजूद नकदी की जरूरत खत्म नहीं हुई है। आंकड़े बताते हैं कि दस वर्षों में देश में नकदी की मात्रा करीब दोगुनी हो गई, जबकि UPI के जरिए होने वाले लेन-देन में लगभग 13,600 गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह बदलाव बताता है कि भारत में डिजिटल भुगतान और नकदी दोनों साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।
नोटबंदी के बाद भी बढ़ती रही नकदी
नवंबर 2016 में नोटबंदी के दौरान चलन में मौजूद करीब 86.9 फीसदी मुद्रा को अमान्य कर दिया गया था। इसके बाद बाजार में नकदी की भारी कमी पैदा हुई और आम लोगों से लेकर कारोबारियों तक को भुगतान के लिए डिजिटल माध्यमों का सहारा लेना पड़ा। हालांकि, ऑनलाइन पेमेंट का इस्तेमाल बढ़ने के बावजूद नकदी की मांग लगातार बनी रही। पिछले दस वर्षों में नकदी की मात्रा करीब दोगुनी होने से साफ है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में नोटों की भूमिका अब भी महत्वपूर्ण है।
UPI ने दस साल में बनाया बड़ा रिकॉर्ड
अप्रैल 2016 में शुरू हुआ UPI आज देश में डिजिटल भुगतान का सबसे प्रमुख माध्यम बन गया है। शुरुआत में इसके जरिए लेन-देन का दायरा काफी सीमित था। वित्त वर्ष 2016-17 में UPI से लगभग 1.78 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 241.62 अरब पहुंच गई। यानी करीब दस वर्षों में UPI ट्रांजैक्शन लगभग 13,600 गुना बढ़ गए। अप्रैल 2016 में इससे केवल 21 बैंक जुड़े थे, जबकि सितंबर 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर 756 हो गई।
डिजिटल पेमेंट के दूसरे माध्यम भी बढ़े
भारत में ऑनलाइन भुगतान का विस्तार सिर्फ UPI तक सीमित नहीं रहा है। NEFT, IMPS, डेबिट और क्रेडिट कार्ड, प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स और आधार आधारित भुगतान का इस्तेमाल भी बढ़ा है। इन डिजिटल माध्यमों से होने वाले कुल लेन-देन का मूल्य वित्त वर्ष 2021-22 में 457.44 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 849.12 लाख करोड़ रुपये हो गया। इससे पता चलता है कि डिजिटल भुगतान अब देश की आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
ये भी पढ़ें : होटल और अस्पतालों में Aadhaar की फोटोकॉपी का झंझट खत्म! अब ऐप से होगी पहचान
डिजिटल दौर में भी कैश क्यों जरूरी?
ऑनलाइन भुगतान की सुविधा बढ़ने के बावजूद लोग नकदी अपने पास रखना पसंद करते हैं। इसकी एक बड़ी वजह जरूरत के समय तुरंत इस्तेमाल और बचत के लिए पैसा उपलब्ध रखना है। कई परिवार रोजमर्रा की खरीदारी और बिजली-पानी के बिल UPI से चुकाते हैं, लेकिन आपात स्थिति के लिए घर में नकदी भी रखते हैं। इसके अलावा देश के कई इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल भुगतान की सुविधाएं सीमित होने के कारण नोटों की जरूरत बनी रहती है।
भुगतान की आदत बदली, नकदी नहीं हुई खत्म
पिछले दस वर्षों में भारत ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई है। दुकानों, बाजारों और छोटे कारोबारियों के यहां QR कोड से भुगतान करना आम हो गया है। इससे रोजमर्रा के कई नकद लेन-देन डिजिटल माध्यमों में बदल गए हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि नकदी की मांग समाप्त हो जाएगी। मौजूदा रुझान बताते हैं कि भारतीय उपभोक्ता सुविधा के लिए UPI और सुरक्षा व जरूरत के लिए नकदी, दोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।