China FDI in India : कारोबारी साल 2026 में भारत ने चीनी निवेश को लेकर बेहद सतर्क रुख अपनाया है। संसद में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से साझा आंकड़ों के मुताबिक, पूरे वित्त वर्ष के दौरान चीन से आए सिर्फ एक FDI प्रस्ताव को मंजूरी मिली, जिसकी कीमत महज एक करोड़ रुपये थी। इसके उलट हांगकांग के 13 निवेश प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई, जिनकी कुल कीमत 610.42 करोड़ रुपये रही।
2020 में बदले थे नियम
चीनी निवेश पर इस सख्ती की बड़ी वजह वर्ष 2020 के बाद बदली FDI नीति है। गलवान घाटी विवाद के बाद सरकार ने DPIIT के 'प्रेस नोट 3' के तहत भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य कर दी थी। इसके दायरे में चीन और पाकिस्तान समेत भारत के अन्य पड़ोसी देश आते हैं। यानी इन देशों का निवेश सामान्य ऑटोमैटिक रूट से नहीं आ सकता।
हर प्रस्ताव की कड़ी जांच
चीन से आने वाले निवेश प्रस्तावों की विभिन्न स्तरों पर जांच की जाती है। इसमें गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और संबंधित सरकारी विभागों की भूमिका रहती है। इसका मकसद राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिमों की पहचान करना और भारतीय कंपनियों पर किसी तरह के अप्रत्यक्ष विदेशी नियंत्रण को रोकना है। यही वजह है कि निवेश की रकम छोटी होने के बावजूद प्रस्ताव को सरकारी जांच से गुजरना पड़ता है।
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हांगकांग को ज्यादा मंजूरी
हांगकांग से आए 13 प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के पीछे भारत की औद्योगिक जरूरतों को भी अहम माना जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल पार्ट्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में कई भारतीय कंपनियां विदेशी इनपुट और सप्लाई चेन पर निर्भर हैं। 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने के लिए जरूरी समझे जाने वाले चुनिंदा निवेश प्रस्तावों को जांच के बाद अनुमति दी जा रही है। हालांकि हांगकांग से आने वाले निवेश पर भी सुरक्षा संबंधी जांच की जाती है।
सिंगापुर सबसे बड़ा स्रोत
DPIIT के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच सरकार ने कुल 63 FDI प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिनकी कुल कीमत 10,292.67 करोड़ रुपये यानी करीब 1.18 अरब डॉलर रही। मंजूर प्रस्तावों की रकम के लिहाज से सिंगापुर सबसे बड़ा स्रोत रहा। सिंगापुर से आए पांच प्रस्तावों को मंजूरी मिली, जिनकी कुल वैल्यू 3,259.88 करोड़ रुपये थी। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि भारत विदेशी निवेश के लिए दरवाजे खुले रखते हुए पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश पर सुरक्षा जांच को प्राथमिकता दे रहा है।