एयर इंडिया ने लगभग छह साल बाद चीन में फिर से अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी है। एयरलाइन ने घोषणा की है कि वह 1 फरवरी 2026 से दिल्ली और शंघाई के बीच सीधी उड़ानें दोबारा शुरू करेगी। इस फैसले को दोनों देशों के बेहतर होते राजनयिक संबंधों का नतीजा माना जा रहा है। एयर इंडिया शंघाई को अपना 48वां अंतरराष्ट्रीय गंतव्य बना चुकी है और कंपनी 2026 में मुंबई–शंघाई रूट शुरू करने की भी योजना बना रही है, जो नियामक मंजूरी पर निर्भर है। दिलचस्प बात यह है कि एयर इंडिया भारत की उन चुनिंदा एयरलाइनों में है जो सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को ले जाती हैं।
क्यों अहम है ये सेवा?
एयर इंडिया के सीईओ एवं एमडी कैंपबेल विल्सन ने इस रूट को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दिल्ली–शंघाई कनेक्टिविटी सिर्फ उड़ान सेवा नहीं बल्कि दो प्राचीन सभ्यताओं और दो आधुनिक आर्थिक शक्तियों के बीच पुल का काम करेगी। उनके अनुसार यह रूट व्यापार, वाणिज्य, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान–प्रदान को नई ऊर्जा देगा। 2020 की शुरुआत में पाबंदियों के कारण भारत–चीन हवाई सेवाएं बंद कर दी गई थीं, लेकिन हालिया समझौतों के बाद यह मार्ग दोबारा खुल रहा है, जिससे दोनों देशों में आवाजाही और आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।
उड़ानों का शेड्यूल और सुविधाएं
एयर इंडिया इस रूट पर बोइंग 787-8 विमान का संचालन करेगी, जिसमें 18 फ्लैट-बेड बिजनेस क्लास सीटें और 238 इकोनॉमी क्लास सीटें होंगी। उड़ान संख्या AI352 दिल्ली से दोपहर 12 बजे रवाना होकर अगले दिन रात 8:20 बजे शंघाई पहुंचेगी। वहीं वापसी की उड़ान AI351 शंघाई से रात 10 बजे चलेगी और सुबह 3:15 बजे दिल्ली पहुंचेगी। दोनों उड़ानें हर मंगलवार, गुरुवार, शुक्रवार और रविवार को संचालित होंगी। कंपनी ने वेबसाइट, मोबाइल ऐप, एयरपोर्ट टिकटिंग ऑफिस और ट्रैवल एजेंटों के माध्यम से टिकट बुकिंग शुरू कर दी है।
कई सेक्टरों को मिलेगा सीधा लाभ
दिल्ली-शंघाई हवाई मार्ग के दोबारा चालू होने से फार्मास्यूटिकल्स, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, मेडिकल टूरिज्म और रिसर्च क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है। चीन और भारत के बीच कारोबार, निवेश और यात्राओं में गति आने से उद्योग जगत भी राहत महसूस कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में यह कनेक्टिविटी दोनों देशों के लिए व्यापार और आपसी सहयोग का नया अध्याय साबित हो सकती है। एयर इंडिया की यह बड़ी वापसी न सिर्फ यात्रियों के लिए उपयोगी है, बल्कि एशिया के दो बड़े बाजारों के बीच कनेक्टिविटी को नई मजबूती भी देगी।