India China Trade Relations : भारत और चीन के रिश्तों में दोबारा सहयोग की संभावनाओं को लेकर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत चीन के साथ संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन इस प्रक्रिया का अंतिम पड़ाव अभी तय नहीं है। गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी देश के साथ संयुक्त उद्यम और कारोबारी साझेदारी के लिए तैयार है, बशर्ते समझौते उचित शर्तों पर हों और भू-राजनीतिक परिस्थितियां सहयोग के अनुकूल बनी रहें।
चीन के साथ रिश्तों पर क्या बोले गोयल
ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में बोलते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि भारत दुनिया के सभी देशों के साथ काम करने को तैयार है। हालांकि, इसके लिए आपसी संपर्क, सहयोग में निरंतरता और उचित कारोबारी शर्तें जरूरी हैं। उन्होंने माना कि अतीत में भारत को चीन के साथ संबंधों को लेकर कुछ चिंताएं रही हैं। अब दोनों देशों के बीच फिर से संबंध बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन आगे की राह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
मोदी-जिनपिंग मुलाकात से बढ़ी चर्चा
भारत और चीन के संबंधों को लेकर यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 12 सितंबर 2026 को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई थी। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा के बीच व्यापार और निवेश से जुड़े मुद्दे भी अहम बने हुए हैं। हालांकि, संबंधों में सुधार की दिशा और उसकी गति कई आर्थिक तथा रणनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
चीन के साथ व्यापार 127.7 अरब डॉलर
भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंध दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 7.9 प्रतिशत बढ़कर 127.7 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 118.39 अरब डॉलर था। इस दौरान चीन को भारत का निर्यात 36.62 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया। पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 14.25 अरब डॉलर था। निर्यात में बढ़ोतरी के बावजूद व्यापार संतुलन भारत के लिए चुनौती बना हुआ है।
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99 अरब डॉलर से ज्यादा हुआ व्यापार घाटा
भारत और चीन के बीच कारोबार बढ़ने के साथ आयात में भी वृद्धि दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2025-26 में चीन से भारत का आयात 16 प्रतिशत बढ़कर 131.62 अरब डॉलर रहा। इसके चलते भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 99.19 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह करीब 85 अरब डॉलर था। व्यापार घाटे का बढ़ना भारत के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच आयात और निर्यात के अंतर का पता चलता है। भारत के लिए निर्यात बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना महत्वपूर्ण बना हुआ है।
निवेश के नियमों पर भी नजर
भारत-चीन संबंधों में व्यापार के अलावा निवेश का मुद्दा भी अहम है। भारत ने चीन के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए नियम सख्त किए हैं। ऐसे में कारोबारी संबंधों को मजबूत करने की कोशिश के साथ सुरक्षा और रणनीतिक हितों का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी होगा। पीयूष गोयल के बयान से सहयोग की संभावनाओं का संकेत जरूर मिलता है, लेकिन चीन के साथ आर्थिक साझेदारी किस दिशा में आगे बढ़ेगी, यह आने वाले फैसलों और दोनों देशों के बीच परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।