India-China Trade : BRICS शिखर सम्मेलन के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे के बीच भारत और चीन के व्यापारिक रिश्ते एक बार फिर चर्चा में हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 151.10 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा। हालांकि इस बड़ी उपलब्धि के पीछे व्यापार असंतुलन की गंभीर चुनौती भी मौजूद है।
भारत का निर्यात बढ़ा, लेकिन घाटा भी बढ़ा
आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में चीन को भारत का निर्यात 36.62 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया। वहीं चीन से आयात 131.63 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके चलते भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। यही बढ़ता घाटा भारत के लिए सबसे बड़ी आर्थिक चिंता बना हुआ है।
किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा निर्भरता?
भारत का बड़ा हिस्सा चीन से आने वालेऔद्योगिक उत्पादों पर निर्भर है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कंप्यूटर उपकरण और ऑर्गेनिक केमिकल्स चीन से आयात होने वाले प्रमुख उत्पाद हैं। चीन से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान और उनके पुर्जे भारतीय उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल और मध्यवर्ती उत्पाद के रूप में इस्तेमाल होते हैं।
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मैन्युफैक्चरिंग की सप्लाई चेन जुड़ी हुई
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय उद्योग अभी भी इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, ईवी बैटरी, सौर उपकरण, दवा उद्योग में उपयोग होने वाले एपीआई और विशेष रसायनों के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर है। यही वजह है कि आयात कम करना आसान नहीं है। भारत में बनने वाले कई उत्पादों की उत्पादन प्रक्रिया भी चीनी सप्लाई चेन से जुड़ी हुई है।
निवेश में अब भी सीमित मौजूदगी
अप्रैल 2000 से मार्च 2026 तक भारत में चीन से लगभग 2.51 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है। हालांकि सुरक्षा और रणनीतिक कारणों से भारत ने सीमा साझा करने वाले देशों के निवेश पर अतिरिक्त निगरानी और नियम लागू कर रखे हैं। इस वजह से चीनी निवेश की रफ्तार पहले जैसी नहीं रही है।
BRICS के मंच पर नई चुनौती
BRICS अब दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में भारत और चीन के लिए यह मंच संवाद और सहयोग का अवसर देता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है, जबकि व्यापार घाटा और रणनीतिक मतभेद भी बने हुए हैं। शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों को आर्थिक सहयोग और व्यापारिक असंतुलन के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।