अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने अपने कारोबार के लिए नए रास्ते तलाशने शुरू किए। इसी कड़ी में चीन के साथ व्यापार तेजी से बढ़ा। हाल ही में चीन की कस्टम्स एजेंसी ने सालाना व्यापार आंकड़े जारी किए, जिनसे साफ हुआ कि भारत और चीन के बीच कारोबार में इजाफा जरूर हुआ है, लेकिन इसके साथ ही व्यापार घाटा भी खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। यही वजह है कि अब इस बढ़ते घाटे को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
चीन को भारत का निर्यात बढ़ा लेकिन काफी नहीं
आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल चीन को भारत का निर्यात बढ़कर करीब 19.75 बिलियन डॉलर हो गया। यह पिछले साल के मुकाबले लगभग 5.5 बिलियन डॉलर ज्यादा है। प्रतिशत के लिहाज से यह करीब दस प्रतिशत की बढ़ोतरी मानी जा रही है। यह जरूर राहत की बात है कि चीन के लिए भारत का निर्यात बढ़ा, लेकिन असली समस्या यह है कि आयात की रफ्तार इससे कहीं ज्यादा तेज है।
आयात ने बढ़ा दिया रिकॉर्ड व्यापार घाटा
जहां भारत का निर्यात बढ़ा, वहीं चीन से भारत का आयात और तेजी से उछल गया। साल 2025 में चीन से भारत का आयात करीब 135.87 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। इसी वजह से दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा बढ़कर 116.12 बिलियन डॉलर हो गया। यह 2023 के बाद दूसरी बार है जब यह आंकड़ा 100 बिलियन डॉलर के पार चला गया है। 2024 में यह घाटा करीब 99 बिलियन डॉलर था, यानी हालात और बिगड़े हैं।
ये भी पढ़ें : एशिया के इस देश का सोना बना ताकत, भंडार ने छुआ नया शिखर, वैश्विक राजनीति में बदली चाल
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा कुल कारोबार
चीन और भारत के बीच कुल कारोबार अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। साल 2025 में यह आंकड़ा 155.62 बिलियन डॉलर रहा। यानी एक तरफ व्यापार बढ़ रहा है, लेकिन दूसरी तरफ संतुलन पूरी तरह चीन के पक्ष में जाता दिख रहा है। चीन का भारत को निर्यात लगातार बढ़ रहा है, जबकि भारत अभी भी चीन को ज्यादा सामान बेच पाने में कामयाब नहीं हो पा रहा।
व्यापार घाटा आखिर होता क्या है
जब कोई देश जितना सामान बाहर बेचता है, उससे कहीं ज्यादा सामान बाहर से खरीदता है, तो उस अंतर को व्यापार घाटा कहा जाता है। आसान भाषा में समझें तो देश ज्यादा खर्च कर रहा है और कम कमा रहा है। लंबे समय तक अगर यह स्थिति बनी रहती है, तो इससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है। विदेशी मुद्रा बाहर जाती है और देश की मुद्रा कमजोर होने लगती है।
बढ़ता घाटा क्यों बन सकता है खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर व्यापार घाटा लगातार बढ़ता रहा, तो इसका असर रोजगार, उद्योग और मुद्रा तीनों पर पड़ सकता है। ज्यादा आयात से घरेलू उद्योग कमजोर हो सकते हैं और नई नौकरियां पैदा होना मुश्किल हो जाता है। साथ ही विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ने से रुपये पर दबाव बनता है। इसलिए चीन के साथ बढ़ते कारोबार को लेकर सिर्फ आंकड़ों पर खुश होना काफी नहीं है, असली चुनौती इस घाटे को कम करने की है।