अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ का असर अब उल्टा पड़ता दिख रहा है। रूस से तेल खरीदने के कारण ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था, जिससे भारतीय व्यापारियों को नुकसान हुआ। लेकिन इसी बीच भारत ने चीन के साथ अपने व्यापारिक रिश्ते मजबूत कर लिए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में चीन को भारत का निर्यात 22 प्रतिशत बढ़ गया है, जिससे ट्रंप की आर्थिक रणनीति को बड़ा झटका लगा है।
भारत-चीन व्यापार में आई तेजी
भारत और चीन के रिश्तों में हाल के महीनों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ने और सीमा विवाद में नरमी आने के बाद व्यापार में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 2025-26 की पहली छमाही में भारत का चीन को निर्यात 22% बढ़ा है। इसमें टेलीफोन सेट, झींगा, एल्यूमीनियम और शिमला मिर्च जैसी वस्तुएं प्रमुख हैं। चीन अब भारत के प्रीमियम उत्पादों को अपने बाजार में जगह देने को तैयार है, जिससे भारतीय निर्यातकों को राहत मिली है।
टैरिफ से झींगा उद्योग को हुआ बड़ा नुकसान
ट्रंप के टैरिफ निर्णय का सबसे ज्यादा असर भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात, खासकर झींगा उद्योग पर पड़ा। अमेरिकी बाजार में 50 प्रतिशत शुल्क लगने से आंध्र प्रदेश और ओडिशा के झींगा निर्यातकों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। अनुमान है कि लगभग 25,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ और करीब 50% ऑर्डर रद्द हो गए। हालांकि अब चीन, जापान और साउथ कोरिया जैसे देशों से नए ऑर्डर मिलने लगे हैं।
ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल
अमेरिका द्वारा भारत और चीन दोनों पर ऊंचे टैरिफ लगाने का फैसला अब उसी के लिए परेशानी का सबब बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की यह नीति वैश्विक व्यापार संतुलन को प्रभावित कर रही है और एशियाई देशों को आपसी सहयोग बढ़ाने का अवसर दे रही है। भारत-चीन के बीच बढ़ते आर्थिक रिश्ते इसका बड़ा उदाहरण हैं।