
भारत और चीन के रिश्ते एक बार फिर पिघलते नजर आ रहे हैं. साल 2020 की सीमा झड़पों के बाद जो तनाव शुरू हुआ था, अब वो धीरे-धीरे कम होता दिख रहा है. सरकार अब ऐसे कई आयात प्रस्तावों को मंजूरी देने की तैयारी में है जो सालों से अटके पड़े थे. इनमें चीन से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, जूते, स्टील, कच्चा माल और घरेलू सामान शामिल हैं. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार अब इन सभी उत्पादों के लिए जरूरी सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को तेज करने जा रही है, ताकि विदेशी कंपनियों को भारत में निर्यात की मंजूरी जल्द मिल सके.
त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग
त्योहारी सीजन में भारत में उपभोक्ता मांग तेजी से बढ़ी है. जीएसटी में कटौती के बाद कारों, टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसे उत्पादों की बिक्री में उछाल आया है. इसका नतीजा ये हुआ कि कई कंपनियों के पास स्टॉक खत्म होने की स्थिति बन गई. ऐसे में केंद्र सरकार ने सोचा कि विदेशी सप्लाई चेन को फिर से मजबूत किया जाए. वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, चीन सहित अन्य देशों के सप्लायर्स को लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी. इससे कंपनियों को न केवल स्थानीय मांग पूरी करने में मदद मिलेगी, बल्कि विदेशी निवेशकों को भी भारत पर भरोसा बढ़ेगा.
BIS सर्टिफिकेशन से खुलेगा रास्ता
भारत में किसी भी विदेशी सामान को बेचने से पहले उसे BIS से अप्रूवल लेना जरूरी है लेकिन 2020 के बाद से चीन के प्रोडक्ट्स को मंजूरी लगभग बंद हो गई थी. अब सरकार इस प्रक्रिया को दोबारा गति देने जा रही है. BIS की टीम विदेशी फैक्ट्रियों का निरीक्षण करेगी और कच्चे माल से लेकर तैयार प्रोडक्ट तक को क्वालिटी क्लियरेंस देगी. पहले जहां चीन में बने इलेक्ट्रॉनिक सामानों को मंजूरी में महीनों लग जाते थे, अब वही अप्रूवल फास्ट ट्रैक पर होंगे. इसका सीधा फायदा भारत की इंडस्ट्री को होगा सप्लाई चेन फिर से पटरी पर आएगी और मार्केट में वस्तुओं की कमी दूर होगी.
मोदी-शी मुलाकात के बाद नई शुरुआत के संकेत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हालिया मुलाकात को इस पूरे घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है. दोनों देशों ने न केवल व्यापार वार्ता बहाल की है, बल्कि सीधी उड़ानें और व्यापार वीजा भी फिर से शुरू कर दिए हैं. चीन ने छह महीने बाद भारत को दुर्लभ पृथ्वी धातुओं का निर्यात भी शुरू किया है, जो इलेक्ट्रिक व्हीकल और नवीकरणीय ऊर्जा सेक्टर के लिए जरूरी हैं.