जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के सत्र के दौरान भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में मानवाधिकारों की स्थिति का मुद्दा उठाया। भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि उसे दूसरे क्षेत्रों पर दावे करने और आतंकवाद को बढ़ावा देने के बजाय अपने देश की आर्थिक और विकास संबंधी चुनौतियों पर ध्यान देना चाहिए। यह बयान उस समय आया, जब पाकिस्तान ने भी परिषद के मंच पर जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था।
PoK में जून से हिंसा का हवाला
क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में जून से सामने आ रही घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने नागरिकों की मौत, छात्रों की गिरफ्तारी और खाद्य पदार्थों तथा दवाओं की आपूर्ति पर कथित पाबंदियों को लेकर चिंता जताई। UNHRC की कार्यवाही में भी पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में जून से नागरिकों के मारे जाने और बड़ी संख्या में लोगों की हिरासत से जुड़ी रिपोर्टें सामने आई हैं।
भारत की ओर से पाकिस्तान से कहा गया कि वह अपने लोगों की समस्याओं के समाधान और आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित करे। त्यागी ने तर्क दिया कि क्षेत्रीय विवादों को उठाने और आतंकवाद से जुड़े आरोपों के बीच पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियों का समाधान नहीं हो सकता।
कश्मीर को लेकर भारत ने दोहराया पुराना रुख
भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर भारत का पारंपरिक रुख दोहराया। उन्होंने पाकिस्तान पर दशकों से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाया और 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन का भी उल्लेख किया।
त्यागी ने कहा कि जिन आतंकवादी संगठनों को पाकिस्तान की ओर से हथियार और प्रशिक्षण मिलने के आरोप लगते रहे हैं, उनके हमलों में अलग-अलग समुदायों के कश्मीरी मारे गए। भारत ने इसी संदर्भ में पाकिस्तान के उस रुख पर सवाल उठाया, जिसमें वह मानवाधिकार परिषद के मंच पर जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों की जांच की मांग करता है।
भारत ने अपनी स्थिति फिर स्पष्ट की
UNHRC में भारत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को लेकर उसका रुख स्पष्ट है। नई दिल्ली के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।