भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है और अपनी कुल जरूरतों का 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। पहले भारत की निर्भरता पश्चिम एशिया के कुछ गिने चुने देशों तक सीमित थी। लेकिन बीते कुछ वर्षों में हालात तेजी से बदले हैं। अब भारत ने किसी एक क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय अपने तेल आयात को ज्यादा सुरक्षित और संतुलित बनाने की रणनीति अपनाई है। इसी के तहत भारत ने अपने सप्लायर्स की संख्या लगातार बढ़ाई है।
27 से 40 देशों तक पहुंचा भारत का नेटवर्क
2022 से पहले भारत करीब 27 देशों से कच्चा तेल खरीदता था। लेकिन रूस यूक्रेन युद्ध और वैश्विक भू राजनीतिक तनाव के बाद भारत ने अपनी रणनीति बदली। 2025-26 तक भारत दुनिया के लगभग 40 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है। इसका मकसद सप्लाई में रुकावट के खतरे को कम करना और बेहतर कीमतों पर तेल हासिल करना है। यह बदलाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम माना जा रहा है।
रूस बना भारत का सबसे बड़ा सप्लायर
वर्तमान समय में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बन चुका है। 2025 में रूस की हिस्सेदारी भारत के कुल तेल आयात में करीब 35 से 36 प्रतिशत रही। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद रूस ने भारत को भारी छूट पर तेल दिया जिससे भारतीय रिफाइनर्स को बड़ा फायदा हुआ। हालांकि 2025 के अंत तक नए प्रतिबंधों के दबाव के कारण रूस की हिस्सेदारी में हल्की गिरावट भी दर्ज की गई।
ये भी पढ़ें : PM Modi दिखाएंगे देश की पहली Vande Bharat Sleeper को हरी झंडी, जानिए रूट किराया और खास सुविधाएं
पश्चिम एशिया की अब भी मजबूत भूमिका
रूस के बाद इराक भारत का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर है जिसकी हिस्सेदारी 20 से 23 प्रतिशत के बीच रही। सऊदी अरब 16 से 18 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर है जबकि संयुक्त अरब अमीरात करीब 8 से 10 प्रतिशत का योगदान देता है। पश्चिम एशिया अब भी भारत की तेल बास्केट का बड़ा हिस्सा बना हुआ है लेकिन अब वह अकेला आधार नहीं रहा।
अमेरिका से बढ़ती खरीदारी
संयुक्त राज्य अमेरिका से भारत का तेल आयात भी लगातार बढ़ा है। 2025 के अंत तक अमेरिका भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 6 से 7 प्रतिशत सप्लाई कर रहा था। कुछ महीनों में यह आंकड़ा 12 प्रतिशत तक भी पहुंच गया था। इससे साफ है कि भारत अमेरिका को भी एक अहम वैकल्पिक सप्लायर के रूप में देख रहा है।
वेनेजुएला की घटती भूमिका और भविष्य
एक समय भारत के लिए अहम रहा वेनेजुएला अब भारत की तेल बास्केट में बेहद सीमित भूमिका निभा रहा है। नवंबर 2025 तक वेनेजुएला की हिस्सेदारी सिर्फ 0.3 से 0.6 प्रतिशत रह गई। जबकि 2013 में यह 12.4 प्रतिशत और 2019 में 5.9 प्रतिशत थी। अमेरिकी प्रतिबंध पेमेंट से जुड़ी दिक्कतें और टैरिफ की धमकियों के चलते भारतीय रिफाइनर्स ने मई 2025 के बाद खरीद लगभग बंद कर दी। हालांकि गिरावट के बावजूद वेनेजुएला पूरी तरह बाहर नहीं हुआ है और 2024 में कुछ समय के लिए वह फिर भारत के टॉप दस सप्लायर्स में शामिल हुआ था।