भारत ने वैश्विक रणनीति के तहत अब भूमध्यसागर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। साइप्रस के साथ बढ़ती साझेदारी और विदेश मंत्री एस जयशंकर की यूरोपीय संघ के मंच जिमनिच में मौजूदगी ने नए भू-राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे दिया है। माना जा रहा है कि भारत का यह कदम तुर्की और पाकिस्तान के बढ़ते गठजोड़ के बीच एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
साइप्रस के साथ रिश्तों को मिला नया आयाम
हाल ही में साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को पूर्ण रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाने का फैसला लिया। इस दौरान रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौते हुए। भारत और साइप्रस के बीच तैयार किया गया पांच वर्षीय रक्षा रोडमैप अब पूर्वी भूमध्यसागर में नई रणनीतिक धुरी के रूप में देखा जा रहा है।
जिमनिच मंच पर भारत की मौजूदगी अहम
विदेश मंत्री एस जयशंकर यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक जिमनिच में हिस्सा लेने साइप्रस पहुंचे हैं। यह मंच यूरोप के बड़े भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत की मौजूदगी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि नई दिल्ली अब यूरोप और भूमध्यसागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक भूमिका को विस्तार देना चाहती है।
तुर्की-पाकिस्तान गठजोड़ को रणनीतिक संदेश
विशेषज्ञों के अनुसार भारत और साइप्रस की बढ़ती नजदीकी तुर्की और पाकिस्तान के उभरते गठजोड़ के बीच अहम मानी जा रही है। साइप्रस लंबे समय से तुर्की के साथ विवादों को लेकर संवेदनशील स्थिति में रहा है। ऐसे में भारत का साइप्रस के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाना क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही वजह है कि तुर्की के मीडिया में भी भारत-साइप्रस रक्षा सहयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल सिस्टम पर बढ़ी चर्चा
तुर्की के मीडिया में यह संभावना जताई जा रही है कि साइप्रस भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम खरीद सकता है। हालांकि अभी किसी आधिकारिक रक्षा सौदे की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन भारतीय रक्षा प्रणालियों में साइप्रस की रुचि पहले भी सामने आ चुकी है। यदि भविष्य में ऐसा कोई समझौता होता है तो यह भूमध्यसागर क्षेत्र में भारत की रक्षा उपस्थिति को और मजबूत कर सकता है।
IMEC और नई वैश्विक रणनीति का हिस्सा
भारत, मध्य पूर्व और यूरोप को जोड़ने वाले IMEC कॉरिडोर में भी साइप्रस की भूमिका अहम मानी जा रही है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि साइप्रस भारत के लिए यूरोप और भूमध्यसागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक और कनेक्टिविटी हब बन सकता है। यही कारण है कि भारत अब इस क्षेत्र में आर्थिक, रणनीतिक और रक्षा सहयोग को एक साथ आगे बढ़ा रहा है।