अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए साफ संदेश दे दिया कि अब जवाब देर से नहीं बल्कि सीधा और सटीक होगा। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 बड़े आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम और स्वदेशी ड्रोन के इस्तेमाल ने दिखा दिया कि भारत की सैन्य ताकत अब पुराने ढर्रे से काफी आगे निकल चुकी है। सिर्फ कुछ दिनों में पूरा ऑपरेशन खत्म कर भारत ने दुनिया को अपनी रणनीतिक क्षमता का एहसास करा दिया।
नया नॉर्मल और सख्त सैन्य नीति
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार का रुख और साफ हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत का नया नॉर्मल बता चुके हैं। अब आतंकियों और उन्हें समर्थन देने वालों में फर्क नहीं किया जाएगा। इस ऑपरेशन ने यह भी दिखाया कि भारत अब स्ट्रैटेजिक रेस्ट्रेंट की नीति से आगे बढ़ चुका है। यही वजह है कि रक्षा मंत्रालय आने वाले समय में सेना को और ताकतवर बनाने की तैयारी में जुट गया है।
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रक्षा बजट बढ़ाने की क्यों पड़ी जरूरत
ऑपरेशन सिंदूर से कई अहम सबक सामने आए हैं। ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई है। लंबी दूरी से हमला करने वाले हथियारों और आधुनिक तकनीक में निवेश अब अनिवार्य हो गया है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के मुताबिक भारत का टफ नेबरहुड और भविष्य की सुरक्षा जरूरतें बजट बढ़ाने की मांग करती हैं। इसी वजह से 2026-27 के लिए करीब 20 प्रतिशत बढ़ोतरी की तैयारी है।
8 लाख करोड़ के पार जा सकता है बजट
वर्तमान में 2025-26 के लिए रक्षा बजट 6.81 लाख करोड़ रुपये है। अगर प्रस्तावित बढ़ोतरी मंजूर होती है तो यह 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है। इस फंड का इस्तेमाल ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम, एयर डिफेंस नेटवर्क, लंबी दूरी की मिसाइलें, नए फाइटर जेट, स्वदेशी हथियार निर्माण और सीमा इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया जाएगा। आत्मनिर्भर भारत के तहत घरेलू कंपनियों और MSME को भी बड़ा फायदा मिलेगा। यह बढ़ोतरी न सिर्फ सुरक्षा मजबूत करेगी बल्कि रोजगार और तकनीकी विकास को भी रफ्तार देगी।