दुनिया जहां ईरान से जुड़े तनाव और महंगे होते कच्चे तेल से जूझ रही है, वहीं भारत ने बिना शोर किए भविष्य की जंग की तैयारी तेज कर दी है। अब फोकस पारंपरिक युद्ध से हटकर ‘नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर’ पर है, जिसमें दुश्मन को दूर से ही कमजोर किया जाता है। सरकार ने रक्षा क्षेत्र में 2.19 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा निवेश कर हाईटेक हथियारों और सिस्टम्स के विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर: युद्ध का बदलता चेहरा
भारत अब उन तकनीकों पर काम कर रहा है, जिनमें आमने-सामने की लड़ाई की जरूरत नहीं होती। ‘नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर’ में साइबर अटैक, ड्रोन हमले, मिसाइल सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर शामिल हैं। इसका उद्देश्य दुश्मन को दूर बैठकर ही निष्क्रिय करना है। इसी रणनीति के तहत देश अपनी सैन्य ताकत को नई तकनीकों से लैस कर रहा है।
6th जेनरेशन फाइटर: उड़ता कमांड सेंटर
भारत ने 5th जेनरेशन फाइटर AMCA के साथ अब 6th जेनरेशन फाइटर जेट के डिजाइन पर भी काम शुरू कर दिया है। ये विमान सिर्फ लड़ाकू नहीं होंगे, बल्कि ‘फ्लाइंग कमांड सेंटर’ की तरह काम करेंगे। इनमें हाइपरसोनिक स्पीड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और C4ISR जैसी अत्याधुनिक क्षमताएं होंगी, जो युद्ध के दौरान रियल-टाइम डेटा और नियंत्रण प्रदान करेंगी।
AI और साइबर डिफेंस पर बड़ा दांव
Defence Research and Development Organisation (DRDO) अब अपने बजट का बड़ा हिस्सा AI आधारित हथियारों और साइबर सुरक्षा पर खर्च कर रहा है। भविष्य की जंग में डेटा और नेटवर्क ही सबसे बड़ा हथियार होंगे, इसलिए भारत दुश्मन के साइबर हमलों को रोकने और खुद की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने पर फोकस कर रहा है।
‘अनंत शस्त्र’ और स्वदेशी S-400: मजबूत एयर डिफेंस
भारत ‘अनंत शस्त्र’ यानी QRSAM जैसी क्विक रिएक्शन मिसाइल सिस्टम तैयार कर रहा है, जो ड्रोन और कम ऊंचाई वाले खतरों को तुरंत नष्ट कर सकती है। इसके साथ ही रूस के S-400 की तर्ज पर स्वदेशी लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम भी विकसित किया जा रहा है, जो दुश्मन के फाइटर जेट्स और बैलिस्टिक मिसाइलों को लंबी दूरी से ही खत्म कर सकेगा।
नौसेना और मिसाइल सिस्टम में भी अपग्रेड
समुद्री सुरक्षा के लिए एडवांस्ड टॉरपीडो डिफेंस सिस्टम और एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी विकसित की जा रही है। वहीं ‘अस्त्र’, ‘नाग’ और ‘ध्रुवास्त्र’ मिसाइलों के मार्क-II वर्जन पर भी काम जारी है। इन सभी प्रोजेक्ट्स का मकसद भारत को मल्टी-डोमेन वॉरफेयर के लिए पूरी तरह तैयार करना है।
2.19 लाख करोड़ का निवेश: रक्षा क्षेत्र में बड़ा उछाल
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 2,19,306.47 करोड़ रुपए का भारी बजट तय किया है, जो पिछले साल से करीब 21.84% ज्यादा है। इस बजट का बड़ा हिस्सा सैन्य आधुनिकीकरण और नई टेक्नोलॉजी के विकास पर खर्च किया जाएगा, जिससे भारत भविष्य के युद्धों के लिए पूरी तरह सक्षम बन सके।