देश की सुरक्षा एजेंसियां संभावित ड्रोन हमलों के खतरे को लेकर सतर्क हो गई हैं। केंद्र सरकार ने जमीन और समुद्री सीमाओं के पास स्थित महत्वपूर्ण ठिकानों को लेकर चेतावनी जारी की है। आशंका जताई गई है कि दुश्मन ड्रोन के जरिए रणनीतिक ठिकानों और अहम संस्थानों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकता है। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने देशभर में एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती की प्रक्रिया तेज कर दी है।
सीमावर्ती ठिकानों की सुरक्षा पर बढ़ा फोकस
सरकार की ओर से जारी चेतावनी में कहा गया है कि बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए संवेदनशील और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी हो गया है। ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल अब केवल निगरानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे महत्वपूर्ण ठिकानों के संचालन को भी प्रभावित किया जा सकता है। इसी वजह से सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा शुरू कर दी गई है।
एंटी-ड्रोन सिस्टम की जांच के लिए बनी विशेष कमेटी
गृह मंत्रालय ने सीमा सुरक्षा बल के तहत एक विशेष समिति का गठन किया है। इस समिति को देश के लिए सबसे प्रभावी एंटी-ड्रोन सिस्टम की पहचान और परीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान सीमा से सटे इलाकों में इन प्रणालियों के परीक्षण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
महत्वपूर्ण ठिकानों का कर रही टीम निरीक्षण
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल ने भी विशेषज्ञों की एक टीम गठित की है, जिसमें विभिन्न सुरक्षा और तकनीकी एजेंसियों के अधिकारी शामिल हैं। यह टीम देश के संवेदनशील प्रतिष्ठानों का दौरा कर रही है और यह आकलन कर रही है कि किन स्थानों पर किस प्रकार की एंटी-ड्रोन तकनीक की जरूरत है। रिपोर्ट के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
देश के पहले पोर्ट पर लगा एडवांस सिस्टम
तमिलनाडु के वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट में फरवरी 2026 में आधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम स्थापित किया गया। यह प्रणाली रेडियो फ्रीक्वेंसी और रडार तकनीक पर आधारित है, जो संदिग्ध ड्रोन की पहचान करने के साथ उसे निष्क्रिय करने की क्षमता भी रखती है। यह सिस्टम 360 डिग्री निगरानी करने में सक्षम है।
ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाई थी भारत की ताकत
मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सुरक्षा बलों ने दुश्मन के कई ड्रोन और हवाई लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया था। इस अभियान ने स्पष्ट कर दिया था कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन सुरक्षा और एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो चुकी है। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए अब देशभर में सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।