EL NINO IMPACT INDIA---भारत समेत दुनिया के मौसम को लेकर बड़ी चेतावनी सामने आई है। प्रशांत महासागर के बढ़ते तापमान के बीच अल नीनो के सक्रिय होने की आशंका जताई गई है। इसका असर आने वाले महीनों में तापमान, बारिश और मौसमी परिस्थितियों पर पड़ सकता है। सितंबर से नवंबर के बीच कई इलाकों में सामान्य से ज्यादा गर्मी रहने का अनुमान है। वहीं, इसका असर सर्दियों के मौसम तक बने रहने की संभावना भी जताई गई है।
प्रशांत महासागर में बढ़ी गर्मी ने बढ़ाई चिंता
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य स्तर से करीब 2.6 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर पहुंच गया है। इसी वजह से अल नीनो की स्थिति मजबूत होने की संभावना बढ़ गई है। अनुमान है कि यह प्रभाव फरवरी 2027 तक बना रह सकता है। समुद्र के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी का असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के मौसम पर देखने को मिल सकता है।
भारत में बारिश पर भी पड़ सकता है असर
भारत के लिए अल नीनो की स्थिति खास चिंता का विषय है। 1 जून से 2 सितंबर 2026 के बीच देश में औसत से 13 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम में बदलाव का असर आगे भी दिखाई देने की आशंका है। सितंबर के दौरान देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान जताया गया है।
सितंबर के बाद सर्दी पर भी असर की आशंका
अल नीनो का प्रभाव केवल मानसून तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक सितंबर में देश के ज्यादातर हिस्सों में अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान सामान्य से ऊपर रह सकते हैं। इसके बाद अक्टूबर और नवंबर में सर्दी की शुरुआत के दौरान भी गर्म मौसम का असर देखने को मिल सकता है। दिसंबर और जनवरी में भी सामान्य से कम ठंड पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
समुद्र का रिकॉर्ड तापमान भी चिंता का संकेत
22 अगस्त को वैश्विक समुद्री सतह का औसत तापमान 21.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। लगातार बढ़ते समुद्री तापमान को जलवायु दबाव का संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक समुद्र और धरती के बढ़ते तापमान के कारण मौसम से जुड़ी चरम घटनाओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में मौसम के पैटर्न पर नजर रखना जरूरी होगा।
एक्सपर्ट ने बताया किन क्षेत्रों पर पड़ सकता है असर
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक अल नीनो का तत्काल असर हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं होगा, लेकिन आने वाले महीनों में इसके प्रभाव दिखाई दे सकते हैं। इससे बारिश के वितरण में बदलाव और तापमान में बढ़ोतरी संभव है। खास तौर पर उत्तर-पूर्वी मानसून प्रभावित हो सकता है। अब मौसम विभाग और विशेषज्ञों की नजर अल नीनो की मजबूती और उसके भारत पर पड़ने वाले असर पर बनी हुई है।