पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर खतरे के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। India को एक साथ दो बड़े ऊर्जा स्रोत मिले हैं—रूस से कच्चा तेल और अमेरिका से एलपीजी। Mangaluru पोर्ट पर इन जहाजों के पहुंचने से घरेलू बाजार में ईंधन आपूर्ति को स्थिर रखने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।
रूस से आया क्रूड ऑयल, रिफाइनरी तक सीधी सप्लाई
रूस से कच्चा तेल लेकर आया ‘एक्वा टाइटन’ जहाज मंगलुरु के समुद्री तट पर पहुंच चुका है। इस जहाज से तेल को सीधे पाइपलाइनों के जरिए रिफाइनरी तक पहुंचाया जाएगा। इससे समय की बचत के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट जोखिम भी कम होगा। यह खेप ऐसे समय आई है, जब वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है।
अमेरिका से LPG की सप्लाई, घरेलू बाजार को राहत
दूसरी ओर, United States के टेक्सास से एलपीजी लेकर ‘पिक्सिस पायोनियर’ जहाज भी सफलतापूर्वक मंगलुरु पोर्ट पर डॉक हो गया। इस गैस सप्लाई से घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
मिडिल ईस्ट संकट के बीच रणनीतिक सफलता
Strait of Hormuz में तनाव और बाधाओं के बावजूद भारत ने वैकल्पिक सप्लाई चैन तैयार कर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है। रूस और अमेरिका से एक साथ ऊर्जा आपूर्ति मिलना भारत की कूटनीतिक और रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
पहले भी पहुंचे LPG टैंकर, सप्लाई बनी रही जारी
इससे पहले भी भारत के लिए राहत की खबर आई थी, जब ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ नामक LPG टैंकर सुरक्षित रूप से गुजरात के मुंद्रा और वाडिनार पोर्ट पहुंचे थे। इन टैंकरों ने जोखिम भरे समुद्री मार्गों को पार कर देश के गैस वितरण नेटवर्क को मजबूती दी।
ईंधन कीमतों पर नियंत्रण की उम्मीद
रूस और अमेरिका से आई इन खेपों से भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की उपलब्धता बनी रहेगी। इससे कीमतों में अचानक उछाल की आशंका कम होगी और आम लोगों को राहत मिल सकती है। सरकार की सक्रिय रणनीति का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है।