Engineering Industry News : अमेरिका की ओर से भारी टैरिफ लगाए जाने के बावजूद भारतीय इंजीनियरिंग सामानों की मांग में तेजी आई है। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच अमेरिका को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात 15.5% बढ़कर 9.97 अरब डॉलर पर पहुंच गया। अगस्त में तो निर्यात में 31% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में अमेरिकी टैरिफ बढ़ने के बाद भारतीय निर्यात में बड़ी गिरावट आई थी। लेकिन कारोबारियों ने तेजी से रणनीति बदली और अमेरिकी बाजार में अपनी पकड़ बनाए रखी। इस प्रदर्शन ने दिखाया है कि भारतीय कंपनियां मुश्किल व्यापारिक हालात में भी अपनी जगह बचाने में सफल रही हैं।
देश के निर्यात में इंजीनियरिंग सेक्टर की बड़ी हिस्सेदारी
इंजीनियरिंग उद्योग भारत के निर्यात का एक अहम हिस्सा है, हालांकि इसकी चर्चा अक्सर कम होती है। देश के कुल निर्यात में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 27 से 28% है। वहीं, तैयार माल के कुल निर्यात में इसका हिस्सा लगभग 40% बताया जाता है। इस क्षेत्र में स्टील, धातु के सामान, मशीनरी, वाहन, ऑटो पार्ट्स, रक्षा उपकरण और विमान के पुर्जे शामिल हैं। कई तरह के उत्पाद होने के कारण यह उद्योग अलग-अलग बाजारों में अपनी जगह बना सकता है। यही विविधता मुश्किल समय में भारतीय निर्यातकों के लिए मददगार साबित हुई है।
50% टैरिफ के बाद भी क्यों कायम रही मांग?
स्टील और एल्युमीनियम से बने कई उत्पादों पर 50% टैरिफ के बावजूद अमेरिकी खरीदारों ने भारतीय कंपनियों से खरीद जारी रखी। स्टील फोर्जिंग निर्यातक अविनाश गुप्ता के मुताबिक, यह शुल्क दूसरे देशों पर भी लागू होता है। इसलिए अमेरिकी खरीदारों के सामने विकल्प सीमित हैं। उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि अमेरिकी कंपनियों के लिए पुराने सप्लायर को बदलना आसान नहीं होता। नई कंपनी से सामान मंगाने के लिए सप्लाई व्यवस्था, गुणवत्ता जांच और माल पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया दोबारा तैयार करनी पड़ती है। इस वजह से भारतीय कंपनियों को बाजार में अपनी जगह बनाए रखने में मदद मिली।
बाजार बचाने के लिए कारोबारियों ने कम किया मुनाफा
भारतीय निर्यातकों और अमेरिकी खरीदारों ने टैरिफ का असर कम करने के लिए मिलकर रास्ता निकाला। कई कारोबारियों ने अपने मुनाफे में कमी स्वीकार की और कुछ मामलों में कम कीमत पर भी सामान भेजा। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस के अध्यक्ष एससी रल्हन के मुताबिक, कई भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी खरीदारों के साथ टैरिफ का बोझ साझा किया। इस तरह उन्होंने बाजार में अपनी जगह बनाए रखने की कोशिश की। रिपोर्ट के अनुसार, अब टैरिफ के रिफंड की प्रक्रिया शुरू होने से निर्यातकों को उम्मीद है कि अमेरिकी आयातक उन्हें भी तय हिस्से का पैसा लौटाएंगे। हालांकि, यह प्रक्रिया धीमी है।
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चीन और यूरोप में भी बढ़ा भारतीय सामान का कारोबार
भारतीय इंजीनियरिंग कंपनियों ने अमेरिका के अलावा दूसरे देशों में भी अपना कारोबार बढ़ाया है। इस क्षेत्र का कुल वैश्विक निर्यात 4.9% बढ़कर 122.43 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वित्त वर्ष 2025-26 में चीन को निर्यात 32.4%, ब्रिटेन को 18.2%, इटली को 16% और जर्मनी को 14.6% बढ़ा। दक्षिण कोरिया, जापान, ब्राजील और नीदरलैंड जैसे बाजारों में भी दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। नए बाजारों में विस्तार से भारतीय कंपनियों को किसी एक देश पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है।
यूरोपीय बाजार से भी निर्यातकों को उम्मीद
भारतीय कारोबारी अब यूरोप, ब्रिटेन और कनाडा में अपनी पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। स्टील उत्पादों के लिए भारत को यूरोपीय संघ से 19 लाख टन का विशेष कोटा मिलने की जानकारी दी गई है। इस सीमा के भीतर भेजे जाने वाले माल पर शून्य शुल्क लागू होता है, जबकि तय सीमा से ज्यादा निर्यात पर 50% टैरिफ देना पड़ता है। ऐसे में भारतीय कंपनियों के लिए कोटे का सही इस्तेमाल अहम है। अमेरिका में मांग बनाए रखने और दूसरे बाजारों में कारोबार बढ़ाने की कोशिशें भारतीय इंजीनियरिंग उद्योग को आगे बढ़ने का अवसर दे रही हैं।