Ethanol Production India : पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल करने के बाद अब भारत के सामने इसे लगातार बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। कम बारिश के कारण मक्का और गन्ने की फसल प्रभावित होने से इनकी कीमतों में तेजी आई है। चावल और चीनी के दाम भी बढ़े हैं। ऐसे में इथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चा माल जुटाना महंगा होता जा रहा है। सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है, एक तरफ पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की योजना जारी रखना और दूसरी तरफ देश की खाद्य जरूरतों को पूरा करना। इसी वजह से फिलहाल खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
समय से पहले हासिल किया E20 का लक्ष्य
भारत ने तय समयसीमा से पहले ही पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य विदेशों से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना है। मिडिल ईस्ट में तनाव और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच इथेनॉल को पेट्रोल के विकल्प के तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अब फसलों की पैदावार प्रभावित होने से E20 लक्ष्य को बनाए रखना आसान नहीं रह गया है।
कम बारिश ने बढ़ाई कच्चे माल की कीमत
इथेनॉल बनाने के लिए मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और चावल का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन कम बारिश के कारण इन फसलों की पैदावार पर असर पड़ने की आशंका है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मक्का और चीनी की कीमतों में करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। वहीं, इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाला चावल भी लगभग 20 प्रतिशत महंगा हो गया है। इससे इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी असर
फसलों की कमी और बढ़ती कीमतों का असर केवल इथेनॉल उद्योग तक सीमित नहीं है। मक्का, चावल और गन्ने जैसे कृषि उत्पादों की उपलब्धता घटने से खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है। यदि अनाज का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर इथेनॉल उत्पादन में किया जाता है, तो खाद्य जरूरतों के लिए इसकी उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका रहती है। ऐसे में सरकार के सामने लोगों की थाली और ऊर्जा जरूरतों के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती है।
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पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के बड़े फायदे
इथेनॉल मिश्रण से भारत को कई तरह के फायदे मिलते हैं। इससे पेट्रोल में कच्चे तेल की जरूरत कम होती है और तेल आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है। इसके अलावा गन्ना और मक्का उगाने वाले किसानों को बाजार मिलता है। इथेनॉल उत्पादन से घरेलू उद्योगों और इससे जुड़े कारोबार को भी बढ़ावा मिलता है। यही वजह है कि सरकार इस योजना को ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम मानती है।
खाने की जरूरतों को पहले पूरा करेगी सरकार
फसल उत्पादन में कमी और कीमतों में तेजी के बीच सरकार के लिए खाद्य सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। लोगों की जरूरत के मुताबिक अनाज उपलब्ध कराना फिलहाल प्राथमिकता है। ऐसे में इथेनॉल उत्पादन और खाद्य जरूरतों के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले समय में फसलों की उपलब्धता, कीमतों और उत्पादन लागत के आधार पर इथेनॉल नीति को लेकर फैसले महत्वपूर्ण होंगे।