भारत और यूरोपीय यूनियन ने हाल ही में ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता किया है। इस डील को सभी समझौतों की जननी कहा जा रहा है। भारत और ईयू के एफटीए ने बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग पर एक तरफ भारत-ईयू एफटीए की तलवार लटकी हुई है, दूसरी ओर भारत के बजट 2026 ने बचा-खुचा इंतजाम कर दिया है।
स्किल डेवलपमेंट का ऐलान किया
भारत ने अपने 2026-27 के बजट में कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बड़ा ऐलान किया है। भारत में मेगा टेक्सटाइल पार्क बनाया जाएगा। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने सिल्क प्रोडक्शन, मशीनरी सपोर्ट, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट प्रोग्राम और टेक्सटाइल्स सेक्टर में स्किल डेवलपमेंट का ऐलान किया है।
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश
केंद्र सरकार ने बजट 2026 में लेबर इंसेंटिव टेक्सटाइल सेक्टर की आत्मनिर्भरता, रोजगार, नवाचार और वैश्विक प्रतियोगिता बढ़ाने के लिए मजबूत नीति बनाने पर जोर डाला है। कपड़ा उद्योग के मामले में फिलहाल बांग्लादेश भारत से आगे है। बांग्लादेश रेडीमेड गारमेंट के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है, वहीं भारत छठे नंबर पर है, लेकिन हाल ही में भारत और ईयू के बीच जो एफटीए साइन हुआ है, उसने बांग्लादेश की चिंता को बढ़ा दी है। बांग्लादेशी मीडिया द डेली स्टार का कहना है कि इसके लागू होने के बाद भारतीय कपड़ों के प्रोडक्ट्स पर ईयू का टैरिफ मौजूदा 12 फीसदी से घटकर जीरो हो जाएगा, जिससे ढाका को लंबे समय से मिल रहा फायदा खत्म हो सकता है।
ड्यूटी को 17 फीसदी से घटाकर जीरो कर देगा
बता दें कि दशकों से भारत के कपड़े, टेक्सटाइल, लेदर और फुटवियर का एक्सपोर्ट ईयू में भारी टैरिफ का सामना करते हुए आता था। हालांकि, एफटीए इस रुकावट को लगभग पूरी तरह से खत्म कर देता है। उदाहरण के लिए, यह फुटवियर पर ड्यूटी को 17 फीसदी से घटाकर जीरो कर देगा और कपड़ों समेत टेक्सटाइल पर 9-12 फीसदी को घटाकर जीरो कर देगा।