भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में नई बहस छेड़ दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे केवल व्यापारिक करार नहीं, बल्कि नियम आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और बहुपक्षवाद का समर्थन करने वाला कदम बताया। उनके शब्दों में यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया के शक्ति संतुलन में तेज़ बदलाव देखे जा रहे हैं।
ऐतिहासिक समझौते की घोषणा
नई दिल्ली में हुए शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और यूरोपीय संघ ने जिस व्यापार समझौते पर मुहर लगाई, उसे दोनों पक्षों ने भविष्य के लिए निर्णायक बताया। इस करार से दो अरब से अधिक आबादी से जुड़े बाजारों के बीच व्यापार और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह साझेदारी केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्थिरता में भी योगदान देगी।
नियम आधारित व्यवस्था पर ज़ोर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में साफ किया कि भारत बहुपक्षवाद और अंतर्राष्ट्रीय नियमों के सम्मान को सर्वोपरि मानता है। उन्होंने कहा कि टैरिफ और व्यापारिक दबावों की राजनीति के बजाय सहयोग और पारदर्शी नियमों से ही वैश्विक समृद्धि संभव है। उनके अनुसार, यह समझौता उन देशों के लिए संदेश है जो आर्थिक नीतियों को दबाव के औज़ार के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग
इस समझौते के साथ रक्षा और सुरक्षा फ्रेमवर्क को भी औपचारिक रूप दिया गया है। काउंटर टेररिज्म, समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दोनों पक्षों के बीच सहयोग गहराने की बात कही गई। प्रधानमंत्री ने बताया कि यह साझेदारी इंडो-पैसिफिक, पश्चिम एशिया और यूरोप से जुड़े रणनीतिक संतुलन को मज़बूती देगी।
यूरोपीय नेतृत्व की प्रतिक्रिया
यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं ने इसे “दो दिग्गज अर्थव्यवस्थाओं की साझेदारी” करार दिया। उनका कहना था कि भारत और यूरोप का साथ आना दुनिया के लिए स्थिरता और विकास का संकेत है। उन्होंने रणनीतिक निर्भरता घटाने और सहयोग बढ़ाने को ऐतिहासिक बदलाव बताया, साथ ही कहा कि यह करार वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा।
संयुक्त बयान और वैश्विक संदेश
दोनों पक्षों के संयुक्त बयान में लोकतंत्र, मानवाधिकार, बहुलवाद और कानून के शासन को साझा मूल्यों के रूप में रेखांकित किया गया। साथ ही आर्थिक लचीलेपन, जलवायु कार्रवाई और सतत विकास लक्ष्यों पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई गई। नेताओं ने कहा कि मौजूदा अस्थिर वैश्विक हालात में यह समझौता अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।