भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को "मदर ऑफ ऑल डील्स" कहा जा रहा है, जो दोनों पक्षों के लिए एक ऐतिहासिक समझौता है। इस समझौते से 2 अरब लोगों के बीच व्यापार होगा, जिससे लाखों नौकरियां पैदा होंगी और दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ेगा। इस समझौते से भारतीय कंपनियों और निर्यातकों को यूरोपीय बाजारों में अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने का अवसर मिलेगा, खासकर उच्च शुल्क वाले क्षेत्रों में। इसके अलावा, भारतीय IT प्रोफेशनल्स और डॉक्टर्स के लिए यूरोप के दरवाजे खुलेंगे, जिससे रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
व्यापार 2032 तक दोगुना होने की उम्मीद
इस समझौते से भारत और EU के बीच व्यापार 2032 तक दोगुना होने की उम्मीद है, जिससे दोनों पक्षों को लाभ होगा। यह समझौता भारत की व्यापार रणनीति में एक निर्णायक बदलाव लाएगा और उसके सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार के साथ आर्थिक संबंधों को नया स्वरूप देगा। इस समझौते के तहत भारत के कई उद्योगों को लाभ होगा। इनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं।
ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग में भी निर्यात बढ़ने की उम्मीद
टेलक्सटाइल और अपैरल के इस उद्योग को यूरोप में शून्य ड्यूटी एक्सेस मिलेगा, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। चमड़ा और फुटवियर के उत्पादों पर भी ड्यूटी कम होगी, जिससे निर्यात बढ़ेगा। वहीं जेम्स और ज्वेलरी के उद्योग को यूरोप में बेहतर बाजार मिलेगा। मरीन प्रोडक्ट्स के उत्पादों पर ड्यूटी फ्री एंट्री मिलने से तटीय राज्यों को लाभ होगा। वहीं फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में भारतीय जेनेरिक दवाओं को यूरोप में अधिक आसानी से प्रवेश मिलेगा। वहीं ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग में भी निर्यात बढ़ने की उम्मीद है।