भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच आखिरकार बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील फाइनल हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक के मंच से खुद इस बड़े समझौते का ऐलान किया। उन्होंने इसे मदर ऑफ ऑल डील्स बताते हुए कहा कि यह समझौता भारत के लिए नए अवसरों के दरवाजे खोलेगा। पीएम मोदी के मुताबिक इस डील से दुनिया का भारत पर भरोसा और मजबूत होगा और भारत की वैश्विक भूमिका और सशक्त बनेगी।
दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का मजबूत गठजोड़
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समझौता दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तालमेल का शानदार उदाहरण है। भारत और यूरोपियन यूनियन मिलकर ग्लोबल जीडीपी के करीब 25 फीसदी हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं वैश्विक व्यापार का लगभग एक तिहाई हिस्सा भी इसी साझेदारी से जुड़ा है। पीएम मोदी ने कहा कि यह डील सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है बल्कि लोकतंत्र और कानून के शासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है।
कई साल की बातचीत के बाद मिली सफलता
भारत और ईयू के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत की शुरुआत साल 2007 में हुई थी। साल 2013 में कुछ अहम मुद्दों पर सहमति न बनने के कारण बातचीत अटक गई थी। इसके बाद जून 2022 में दोनों पक्षों ने फिर से बातचीत शुरू की। करीब 18 दौर की लंबी वार्ता के बाद अब जाकर यह समझौता फाइनल हुआ है। इसे भारत की कूटनीतिक और आर्थिक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
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भारतीय निर्यातकों को मिलेगी बड़ी राहत
इस ट्रेड डील से भारत के कई प्रमुख सेक्टर्स को सीधा फायदा होगा। टेक्सटाइल्स, लेदर और फुटवियर, जेम्स एंड जूलरी, केमिकल्स और समुद्री उत्पादों पर यूरोप में लगने वाले भारी आयात शुल्क में बड़ी राहत मिलेगी। अभी भारतीय निर्यात पर ईयू का औसत टैरिफ करीब 3.8 फीसदी है, जबकि समुद्री उत्पादों पर यह 26 फीसदी तक और लेदर गुड्स पर 17 फीसदी तक जाता है। इस समझौते के बाद इन दरों में कमी आने की उम्मीद है।
ईयू से आयात और भारत के लिए संतुलन
दूसरी तरफ यूरोपियन यूनियन से भारत आने वाले उत्पादों पर औसतन 9.3 फीसदी का आयात शुल्क लगता है। इस डील के जरिए दोनों पक्षों के बीच व्यापार संतुलन बेहतर होने की संभावना है। पीएम मोदी ने कहा कि यह समझौता भारत-ब्रिटेन ट्रेड डील का भी पूरक साबित होगा और इससे विनिर्माण क्षेत्र के साथ-साथ सहायक सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी।
ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का बड़ा संकेत
इंडिया एनर्जी वीक में बोलते हुए पीएम मोदी ने ऊर्जा क्षेत्र पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा निवेश के लिए बड़ा बाजार बन चुका है। इस दशक के अंत तक तेल और गैस सेक्टर में 100 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत जल्द ही दुनिया का सबसे बड़ा तेल शोधन केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसकी क्षमता 300 मीट्रिक टन तक पहुंचाई जाएगी।