भारत ने यूरोपीय संघ के साथ अब तक का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता पूरा कर लिया है। इस समझौते की घोषणा होते ही भारत और यूरोप में खुशी का माहौल बन गया। वहीं दूसरी ओर बांग्लादेश और तुर्की जैसे देशों में चिंता साफ दिखाई देने लगी है। वजह साफ है, यह डील भारत के उद्योगों को सीधे यूरोपीय बाजार से जोड़ती है। खासकर कपड़ा और परिधान उद्योग को इससे बड़ा फायदा मिलने वाला है, जो अब तक कई दूसरे देशों के कब्जे में था।
कपड़ा उद्योग को सबसे बड़ा फायदा
इस समझौते का सबसे ज्यादा असर कपड़ा और परिधान उद्योग पर पड़ने वाला है। जानकारों का कहना है कि आने वाले 3 सालों में भारत का परिधान निर्यात दोगुना हो सकता है। उद्योग से जुड़े संगठनों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है। उनका मानना है कि इससे भारत की वैश्विक पहचान मजबूत होगी और देश ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ेगा। उत्पादन बढ़ने से छोटे और बड़े दोनों तरह के उद्योगों को फायदा मिलेगा।
यूरोप में बिना ड्यूटी एंट्री का फायदा
इस समझौते के तहत अब भारतीय कपड़ों को यूरोपीय बाजार में बिना किसी ड्यूटी के एंट्री मिलेगी। इससे भारतीय उत्पाद वहां सस्ते और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे। अभी तक भारत की यूरोप में बढ़त काफी धीमी थी, लेकिन अब इसमें सालाना 20 से 25 प्रतिशत तक की तेजी आ सकती है। कीमत के साथ-साथ अब भारतीय कंपनियां गुणवत्ता, डिजाइन और टिकाऊ उत्पादन पर भी ज्यादा ध्यान दे सकेंगी।
बांग्लादेश और तुर्की की बढ़ी चिंता
भारत और यूरोप की यह डील बांग्लादेश के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है। बांग्लादेश के कुल निर्यात का करीब आधा हिस्सा यूरोप जाता है और इसमें सबसे बड़ा रोल कपड़ा उद्योग का है। वहां की अर्थव्यवस्था काफी हद तक इसी सेक्टर पर टिकी है। अब जब भारत को बिना ड्यूटी यूरोप में जगह मिलेगी, तो बांग्लादेश की बाजार हिस्सेदारी सीधे तौर पर घट सकती है। यही डर तुर्की को भी सता रहा है।
यूरोप है दुनिया का सबसे बड़ा बाजार
यूरोपीय संघ दुनिया का सबसे बड़ा परिधान आयातक माना जाता है। हर साल अरबों डॉलर के कपड़े यहां मंगाए जाते हैं। जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन जैसे देश भारत के लिए बड़े बाजार बन सकते हैं। फिलहाल यूरोप के कुल परिधान बाजार में भारत की हिस्सेदारी बहुत कम है, लेकिन यह समझौता उसे तेजी से बढ़ा सकता है। इससे भारत को दूसरे देशों के बराबर खड़े होने का मौका मिलेगा।
रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगी ताकत
यह समझौता भारत के कपड़ा उद्योग के लिए एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। उत्पादन बढ़ने से लाखों नए रोजगार पैदा हो सकते हैं। इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ को भी नई रफ्तार मिलेगी। यूरोपीय खरीदार अब भारतीय उत्पादों को ज्यादा भरोसे के साथ अपनाएंगे। कुल मिलाकर यह डील भारत को वैश्विक बाजार में मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।